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West Bengal : फालता (बंगाल) में भी भगवा लहर…..

West Bengal/New Delhi : भाईको, ममता के भतीजे और डायमंड हारबर से टीएमसी के सांसद अहंकार और गुंडागर्दी से भरपूर धमकी देते थे की उनके संसदीय क्षेत्र से दस जन्म में भी भाजपा नहीं जीत सकती, दिल्ली के भाजपा के अमित शाह सहित क्षत्रपों को बंगाल चुनाव के नतीजे आने के दिन 4 मई को दोपहर बारह बजे के बाद बंगाल में घुसने की चुनौती दे रहे थे, फालता सीट से टीएमसी उम्मीदवार अपने आपको पुष्पा बता रहे थे जो किसी के सामने झुकता नहीं है । उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा जो चुनावी ड्यूटी में बंगाल गए हुए थे उनको धमकी दे रहे थे की यह जंग उन्होंने शुरू की है और समाप्त वह (जहांगीर) करेंगे।

यह अहंकार कुछ दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जैसा ही था जिसने विधानसभा पटल पर कहा था की भाजपा सात जन्म भी ले ले तो मुझे दिल्ली में नहीं हरा सकती और नतीजा वह ख़ुद भी अपना चुनाव हार गए। अहंकार तो रावण का भी नहीं रहा जिसके अहंकार के कारण उसका पुरा खानदान समाप्त हो गया था।

इसी प्रकार आज के फालता चुनाव नतीजों के बाद अभिषेक बनर्जी, ममता बनर्जी, फालता से टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर जिसने चुनाव से दो दिन पहले अपनी हार का मंजर भांपकर अपने को चुनाव से ही अलग कर लिया था को फालता की जनता ने ऐसा जवाब दिया है कि कई दिन तक इन्हें और इंडी गठबंधन को नींद नहीं आयेगी, बेचैनी, हैरानी, परेशानी बढ़ेगी। उत्तर प्रदेश चुनाव में खतरे को भांपकर अखिलेश भी अपनी चुनावी रणनीति बदलाव कर रहे है। सॉफ्ट हिंदुत्व की और बढ़ रहे है। मंदिर जा रहे हैं, रामायण बांट रहे है । भाजपा की हिंदुत्व की राह पर चलने का असफल प्रयास कर रहे हैं। अखिलेश शायद भूल गए हैं को ओरिजिनल ओरिजिनल होता है और फोटो कॉपी फोटो कॉपी ही होती है । जनता के पास ओरिजिनल वास्तविक हिंदुत्व की रक्षा करने वाली पार्टी है तब वह डुप्लीकेट पर विश्वास क्यों करेगी।

यह सब मैं इसलिए लिख रहा हूँ क्यूंकि आज भाजपा ने फालता विधानसभा चुनाव 1,08,000 से अधिक वोट से जीत लिया, वोट के कुल प्रतिशत का 71 प्रतिशत से अधिक भाजपा को मिला । टीएमसी, कांग्रेस और कम्युनिस्टों की जमानत जब्त हो गई । भाजपा को इन तीनो पार्टियों के वोट को जमा भी कर लें तब भी इन सबके वोट से लगभग दुगने वोट मिले हैं।

टीएमसी को 8,000, कांग्रेस को 10,000 और कम्युनिस्टों को 40,000 वोट मिले जबकि भाजपा की जीत का अंतर 1,08,000 से ज़्यादा है। इसका निष्कर्ष यह निकलता है की यदि चुनाव भयमुक्त, निष्पक्ष वातावरण में हो तो भाजपा अकेले ही पूरे इंडो गठबंधन से बहुत आगे है । टीएमसी और इंडो गठबंधन में घबराहट है कि यदि लोकसभा चुनाव भी ऐसे ही हुआ तो 2029 में होने वाले चुनाव में क्या होगा साफ़ साफ़ दिख रहा है। विधान सभा की चुनाव की हार तो अभी पचा नहीं पाए लेकिन फालता चुनाव ने होश ही उड़ा दिए और 2029 चुनाव की और इशारा इंगित कर दिया है ।

प्रश्न है की बंगाल चुनाव में जो हुआ वह हुआ कैसे ? हिंदुत्व की लहर तो थी ही लेकीन वह 2021 के चुनाव में भी थी । इस बार फ़र्क़ यह था की चुनाव आयोग अतिरिक्त सतर्क था, सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था थी। टीएमसी को किसी को वोट ना देने को बाध्य करने का मौका नहीं मिला, बोगस वोटिंग नहीं हुई, जबरदस्ती टीएमसी को वोट डलवाने का मौला नहीं मिला, हिंसा और हत्याएँ करने का मौक़ा नहीं मिला । तुष्टिकरण के कारण सताए गए लोगों ने खुलकर वोट दिया, अवैध बांग्लादेशी/रोहिंग्या वोट नहीं कर पाए और अब शायद आगे भी कभी नहीं कर पाएंगे ।

ये कि बात और बंगाल में भाजपा सरकार ने जो अभिव्यक्ति निर्णय लिए हैं उस पर भी बंगाल की जनता ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। चुनाव आयोग को साधुवाद, लोकतंत्र की जीत हुई है।

राकेश शर्मा

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