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BHAVINI CMD Appointment: पी. ए. सुरेश बाबू ने संभाला नेतृत्व, परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को मिलेगी नई गति

BHAVINI CMD Appointment: पी. ए. सुरेश बाबू ने संभाला नेतृत्व, परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को मिलेगी नई गति

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भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत वरिष्ठ वैज्ञानिक पी. ए. सुरेश बाबू ने भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनी) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (CMD) का पदभार संभाल लिया है। उनके नेतृत्व में देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को नई दिशा और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

सुरेश बाबू परमाणु ऊर्जा विभाग के विशिष्ट वैज्ञानिक हैं और इससे पहले न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड में निदेशक (एचआर) के पद पर कार्यरत थे। उनके पास करीब 37 वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें उन्होंने प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWR), प्रेसराइज्ड वाटर रिएक्टर (PWR) और कॉर्पोरेट प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अहम योगदान दिया है।

भाविनी की भूमिका देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह संस्था कलपक्कम स्थित 500 मेगावाट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) के निर्माण, कमीशनिंग, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालती है। इसके अलावा भविष्य में फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों के विकास का दायित्व भी इसी संस्था के पास है, जो भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का अहम हिस्सा है।

अपने करियर की शुरुआत में सुरेश बाबू ने 1988 में गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज त्रिशूर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और 1989 में बार्क ट्रेनिंग स्कूल से न्यूक्लियर ट्रेनिंग हासिल की। इसके बाद उन्होंने मद्रास एटॉमिक पावर स्टेशन में लगभग 14 वर्षों तक विभिन्न निर्माण परियोजनाओं पर कार्य किया।

बाद में वे कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट से जुड़े, जहां उन्होंने अलग-अलग निर्माण कार्यों का नेतृत्व करते हुए स्टेशन डायरेक्टर के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। फरवरी 2022 में भारत सरकार ने उन्हें एनपीसीआईएल में निदेशक (एचआर) नियुक्त किया था।

अपने करियर में वे अणुशक्ति विद्युत निगम लिमिटेड के निदेशक, एनपीसीआईएल के बोर्ड सदस्य और यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के बोर्ड मेंबर भी रह चुके हैं। उनका यह अनुभव अब भाविनी के नेतृत्व में नई ऊर्जा और रणनीतिक दिशा प्रदान करेगा।

भाविनी के सीएमडी के रूप में उनका कार्यकाल तीन वर्षों का होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में भारत के फास्ट ब्रीडर रिएक्टर प्रोग्राम को नई रफ्तार मिलेगी, जिससे देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी।

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