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UGC Law Protest: UGC कानून लागू करने के समर्थन में स्वामी प्रसाद मौर्य और अपनी जनता पार्टी का जंतर मंतर पर प्रदर्शन

UGC कानून लागू करो नहीं तो कुर्सी खाली करो: स्वामी प्रसाद मौर्य

UGC Law Protest: UGC कानून लागू करने के समर्थन में स्वामी प्रसाद मौर्य और अपनी जनता पार्टी का जंतर मंतर पर प्रदर्शन

रिपोर्ट: अभिषेक ब्याहुत

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) कानून को लागू कराने के लिए आज अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर मंतर पर जोरदार प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस मौके पर पार्टी के हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए और केंद्र सरकार तथा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

पार्टी ने दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ विश्वविद्यालयों में हो रहे अत्याचार और भेदभाव की घटनाओं का हवाला देते हुए, UGC कानून में दिए गए नए प्रावधानों की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रदर्शन के दौरान पार्टी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपा और उनसे कानून को लागू करने की अपील की।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि देश में UGC कानून लागू न होने की स्थिति के लिए केंद्र में BJP सरकार की लचर नीति जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि नए कानून पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टे लगने का कारण केंद्र सरकार की लापरवाही और कानूनी पैरवी में कमजोरी है। मौर्य ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार ने न्यायालय में मजबूती से पैरवी की होती और सरकारी वकीलों ने कानून के महत्व पर प्रकाश डाला होता तो आज यह कानून लागू हो चुका होता। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने इस कानून को केवल दिखावा करने के लिए लाया, ताकि दलित और पिछड़े वर्ग को खुश किया जा सके, लेकिन वास्तविकता में सरकार कानून को लागू करने के पक्ष में नहीं थी।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने आगे कहा कि विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थाओं में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के साथ जाति के आधार पर भेदभाव आम है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कई छात्रों को मेरिट के बावजूद पोस्ट ग्रेजुएशन, पीएचडी और अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश से वंचित किया जाता है। प्रोफेसर और वाइस चांसलर अक्सर प्रशासनिक और व्यक्तिगत पक्षपात के कारण छात्रों के अधिकारों का हनन करते हैं।

उन्होंने बीएचयू का उदाहरण देते हुए बताया कि आईएम पोस्ट ग्रेजुएशन में आठ सीटों के लिए केवल एक ही पिछड़ा वर्ग का छात्र चुना गया। मेरिट में शीर्ष पर रहने के बावजूद अन्य छात्रों को प्रवेश नहीं मिला। इसी प्रकार, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ में एक सोनकर समाज का छात्र पीएचडी पूरी करने के बावजूद वाइस चांसलर द्वारा उसका डिग्री निषेध किया गया। इस घटना के खिलाफ पार्टी ने तत्काल हस्तक्षेप किया और सोशल मीडिया तथा प्रतिनिधि मंडल के माध्यम से विरोध दर्ज कराया।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें केवल वोट के समय एससी, एसटी और ओबीसी समाज को हिंदू कहकर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकती हैं, लेकिन वास्तविक अधिकार और सुरक्षा देने में विफल रहती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी एससी, एसटी और ओबीसी समाज के लोगों के साथ हिंसा, अपमान, बलात्कार और हत्या जैसी घटनाएं जारी हैं। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे कुछ विश्वविद्यालयों और प्रशासनिक संस्थानों में पिछड़े वर्ग के छात्रों और महिलाओं के साथ अत्याचार और भेदभाव किया जाता है।

मौर्य ने चेतावनी दी कि अब केवल ज्ञापन और बातचीत से काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि हक, अधिकार और संविधान के संरक्षण के लिए सड़क पर संघर्ष करना होगा। उन्होंने जनता से संकल्प लेने और इस आंदोलन में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की। स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि भारतीय संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने एससी, एसटी और ओबीसी समाज के लिए आरक्षण का अधिकार दिया ताकि वे शिक्षा, धन और सम्मान से वंचित न रहें।

प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें विश्वविद्यालयों में हो रहे भेदभाव और UGC कानून के महत्व को रेखांकित किया गया। स्वामी प्रसाद मौर्य ने जोर देकर कहा कि अब उत्तर प्रदेश से इस आंदोलन की शुरुआत होनी चाहिए और कानून लागू होने तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को चेतावनी दी जा रही है और यदि तुरंत कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और बीजेपी के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की, जिसमें उन्होंने कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए हर हक को सड़कों पर जाकर सुरक्षित करना पड़ेगा। स्वामी प्रसाद मौर्य ने जनता से संकल्प लेने और इस आंदोलन को मजबूत बनाने की अपील की।

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