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Scrap Mafia Ravi Kana: ग्रेटर नोएडा के स्क्रैप माफिया रवि काना को मिली अंतरिम जमानत, नोएडा पुलिस को बड़ा झटका

Scrap Mafia Ravi Kana: ग्रेटर नोएडा के स्क्रैप माफिया रवि काना को मिली अंतरिम जमानत, नोएडा पुलिस को बड़ा झटका

नोएडा। ग्रेटर नोएडा के कुख्यात स्क्रैप माफिया रविंद्र सिंह उर्फ रवि काना को लेकर सेक्टर-63 थाना क्षेत्र में दर्ज एक अहम आपराधिक मामले में जिला न्यायालय ने अंतरिम जमानत दे दी है। अदालत के इस फैसले को नोएडा पुलिस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि हाल के दिनों में एनसीआर क्षेत्र में संगठित अपराध और माफिया गतिविधियों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही थी।

यह मामला भारतीय न्याय संहिता की तीन गंभीर धाराओं के तहत दर्ज किया गया था, जिनमें जबरन वसूली, जान से मारने की धमकी और संगठित अपराध से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, पिछले महीने दर्ज इस मामले में रवि काना और उनके सहयोगियों पर कारोबारियों से दबाव बनाकर अवैध वसूली करने तथा विरोध करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देने के आरोप लगे थे। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने इसे संगठित आपराधिक नेटवर्क से जुड़ा पाया था।

रवि काना पहले से ही कई गंभीर मामलों में आरोपी रहे हैं। उन पर गैंगस्टर एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। प्रशासन ने पूर्व में उनकी अवैध संपत्तियों की पहचान कर कुर्की की कार्रवाई भी की थी। अधिकारियों का दावा रहा है कि स्क्रैप कारोबार की आड़ में अवैध वसूली और दबंगई का एक बड़ा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था, जिसकी जांच लंबे समय से चल रही है।

29 जनवरी 2026 को रवि काना को बांदा जेल से जमानत पर रिहा किया गया था। हालांकि उनकी रिहाई को लेकर विवाद भी सामने आया। बताया गया कि बी-वारंट के बावजूद रिहाई की प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं हुईं, जिसके बाद संबंधित जेल अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया और मामले में एफआईआर दर्ज की गई। इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए।

रिहाई के बाद नोएडा पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए रवि काना की ओर से जिला न्यायालय में अंतरिम अथवा अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की गई। 11 फरवरी 2026 को इस मामले में सुनवाई हुई, जिसमें पुलिस ने केस डायरी और अब तक की जांच से जुड़े दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कुछ शर्तों के साथ अंतरिम जमानत मंजूर कर दी।

अदालत द्वारा लगाई गई शर्तों के तहत आरोपी को जांच में सहयोग करना होगा, बिना अनुमति क्षेत्र नहीं छोड़ना होगा और गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करना होगा। यदि शर्तों का उल्लंघन होता है तो जमानत निरस्त की जा सकती है।

इस फैसले के बाद एनसीआर में अपराध नियंत्रण को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर पुलिस और प्रशासन संगठित अपराध पर नकेल कसने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अदालत के आदेश ने कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्यों की मजबूती पर भी सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल इस मामले में आगे की सुनवाई और पुलिस की अगली रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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