Noida Waterlogging: 13 सेक्टरों में जलभराव से मिलेगी राहत, 27 करोड़ से बनेगा हेड रेगुलेटर और नाला
नोएडा। नोएडा के एक्सप्रेसवे किनारे बसे 13 सेक्टरों में बारिश के दौरान होने वाली जलभराव की समस्या को दूर करने की दिशा में काम शुरू हो गया है। सेक्टर-150 समेत आसपास के सेक्टरों में जलनिकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सिंचाई विभाग ने हेड रेगुलेटर के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है। इसके साथ ही बारिश के पानी की निकासी के लिए एक नाला भी विकसित किया जाएगा। पूरी परियोजना पर करीब 27 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इसे लगभग एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक एके अरोड़ा के अनुसार, सिंचाई विभाग की ओर से परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया गया था, जिसे प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी की मंजूरी मिल चुकी है। इसके बाद सिंचाई विभाग ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। हेड रेगुलेटर के निर्माण के साथ क्षेत्र में बारिश के पानी की निकासी के लिए जरूरी ढांचा भी तैयार किया जाएगा।
इस परियोजना से सेक्टर-150, 151, 152, 153, 154, 155, 156, 157, 158, 159, 160, 161 और 162 को लाभ मिलने की उम्मीद है। इन सेक्टरों में तेज बारिश के दौरान कई जगह पानी जमा हो जाता है। कुछ आवासीय सोसाइटियों और आसपास के इलाकों में भी बारिश के पानी के भरने की समस्या सामने आती रही है। जलनिकासी व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने के कारण कई बार पानी निकलने में काफी समय लग जाता है।
नई परियोजना का मुख्य उद्देश्य इन सेक्टरों से निकलने वाले बारिश के पानी को व्यवस्थित तरीके से नजदीकी जल निकासी तंत्र तक पहुंचाना है। इसके लिए हेड रेगुलेटर और नाले का निर्माण किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, नई व्यवस्था तैयार होने के बाद बारिश के पानी को नियंत्रित तरीके से हिंडन नदी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
वर्तमान व्यवस्था में इन सेक्टरों से निकलने वाले बारिश के पानी को सेक्टर-168 की ओर मोड़कर नाले के जरिए यमुना तक पहुंचाया जाता है। नई परियोजना के पूरा होने के बाद इस क्षेत्र में जलनिकासी के लिए एक अतिरिक्त और अधिक व्यवस्थित मार्ग उपलब्ध होगा। इससे मौजूदा व्यवस्था पर दबाव कम करने और जलभराव वाले इलाकों से पानी तेजी से निकालने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हेड रेगुलेटर इस पूरी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। इसके जरिए पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने और जलनिकासी की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। इसके साथ विकसित किया जाने वाला नाला बारिश के पानी को आगे ले जाने का माध्यम बनेगा। परियोजना की तकनीकी रूपरेखा के अनुसार दोनों ढांचों के तैयार होने के बाद आसपास के सेक्टरों में जलनिकासी की क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
बारिश के मौसम में सेक्टर-150 और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव स्थानीय निवासियों के लिए लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। तेज बारिश होने पर सड़कें, खाली भूखंड और कई निचले क्षेत्र पानी से भर जाते हैं। आवासीय सोसाइटियों में भी पार्किंग, आंतरिक सड़कों और प्रवेश मार्गों के आसपास पानी जमा होने की स्थिति सामने आती है। नई जलनिकासी परियोजना से इन समस्याओं को कम करने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्राधिकरण के मुताबिक, सिंचाई विभाग ने इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 27 करोड़ रुपये निर्धारित की है। मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है और इसे करीब एक साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के पूरा होने के बाद इसके प्रभाव का आकलन बारिश के मौसम में जलनिकासी की स्थिति के आधार पर किया जा सकेगा।
नोएडा में एक्सप्रेसवे के आसपास तेजी से विकसित हो रहे आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों को देखते हुए जलनिकासी का मजबूत नेटवर्क तैयार करना भी जरूरी हो गया है। नए सेक्टरों में आबादी और निर्माण गतिविधियां बढ़ने के साथ बारिश के पानी के प्रबंधन की आवश्यकता भी बढ़ी है। ऐसे में हेड रेगुलेटर और नाले की यह परियोजना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किए जा रहे ढांचे का हिस्सा है।
अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद बारिश के दौरान पानी को व्यवस्थित तरीके से निकालने में मदद मिलेगी। इससे सड़कों पर पानी जमा होने की स्थिति को कम करने के साथ सोसाइटी और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव से राहत मिलने की संभावना है।
फिलहाल हेड रेगुलेटर और नाले का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। आने वाले महीनों में परियोजना के विभिन्न चरण पूरे किए जाएंगे। यदि निर्धारित समयसीमा के अनुसार काम पूरा हुआ तो अगले चरण में इन 13 सेक्टरों की जलनिकासी व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिल सकता है।


