Noida Engineer Death: ‘ऐसे ही रह बेटा, गाड़ी बुलवाई है’, सीढ़ी पर बैठ निर्देश देती रही रेस्क्यू टीम, सामने आया युवराज का आखिरी वीडियो

Noida Engineer Death: ‘ऐसे ही रह बेटा, गाड़ी बुलवाई है’, सीढ़ी पर बैठ निर्देश देती रही रेस्क्यू टीम, सामने आया युवराज का आखिरी वीडियो
नोएडा के ग्रेटर नोएडा सेक्टर-150 के पास हुए दर्दनाक हादसे में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले ने अब और गंभीर मोड़ ले लिया है। घटना से जुड़े नए वीडियो सामने आने के बाद राहत और बचाव कार्य की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। शुक्रवार रात हुए इस हादसे में युवराज की कार भारी जलभराव वाले गड्ढे या अंडरपास में फंस गई थी, जिसके चलते कार पानी में डूबती चली गई और युवराज की जान नहीं बच सकी।
अब सामने आए वीडियो में युवराज जंगलनुमा इलाके में फंसे हुए नजर आते हैं। वे अपने मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट जलाकर लगातार मदद की गुहार लगाते दिख रहे हैं। वीडियो में साफ दिखाई देता है कि वे अपनी लोकेशन बताने के लिए फोन की लाइट को ऊपर-नीचे घुमा रहे थे ताकि रेस्क्यू टीम तक उनकी स्थिति का सही अंदाजा पहुंच सके। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उसी वीडियो में बचाव दल के कुछ कर्मचारी पास ही सीढ़ी पर बैठे नजर आते हैं और युवराज को कहते सुनाई देते हैं—“ऐसे ही रह बेटा, गाड़ी बुलवाई है।” इसके बावजूद वे सही दिशा तय करने और मौके तक पहुंचने में उलझे दिखाई देते हैं।
वीडियो से यह भी संकेत मिलता है कि सीढ़ी पर बैठे होने के बावजूद रेस्क्यू टीम युवराज की सटीक लोकेशन को लेकर भ्रम में थी। दिशा को लेकर असमंजस और संसाधनों की कमी के चलते राहत कार्य में लगातार देरी होती रही। यही देरी युवराज की जान पर भारी पड़ गई। अब सवाल उठ रहा है कि जब युवक जिंदा था और लगातार संकेत दे रहा था, तब उसे समय रहते क्यों नहीं निकाला जा सका।
मृतक के पिता राजकुमार मेहता ने उस खौफनाक रात का मंजर बयां करते हुए बताया कि करीब रात 12 बजे युवराज का फोन आया था। उसने घबराई हुई आवाज में बताया कि वह नाले में गिर गया है और मदद की जरूरत है। पिता तुरंत सेक्टर-150 के ऐस सिटी नाले के पास पहुंचे, लेकिन वहां उनका बेटा नहीं मिला। लगभग आधे घंटे तक वे आसपास घटनास्थल ढूंढते रहे। बाद में जब सही जगह पहुंचे तो देखा कि युवराज अपनी कार की छत पर लेटा हुआ था और सड़क से करीब 70 फीट दूर पानी के बीच फंसा हुआ था।
राजकुमार मेहता ने बताया कि इस दौरान उन्होंने डायल-112 पर पुलिस को सूचना दी। उनका बेटा बीच-बीच में बचाओ-बचाओ की आवाज लगा रहा था और टॉर्च जलाकर यह साबित कर रहा था कि वह अभी जिंदा है। मौके पर पहुंची पुलिस और दमकल विभाग की टीम ने पहले रस्सी फेंककर बचाने की कोशिश की, लेकिन रस्सी युवक तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद क्रेन बुलाई गई, लेकिन वह भी सही जगह तक नहीं पहुंच पाई।
परिवार का आरोप है कि मौके पर न तो कोई गोताखोर मौजूद था और न ही पर्याप्त संसाधन। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम को बुलाने में भी काफी वक्त लग गया। पिता का कहना है कि वे अपनी आंखों के सामने बेटे को कार सहित पानी में डूबते हुए देखते रहे, लेकिन उसे बचाने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। कई घंटे चले सर्च ऑपरेशन के बाद जब युवराज को बाहर निकाला गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
इस हादसे ने इलाके की व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस स्थान पर यह घटना हुई, वहां पहले भी एक ट्रक कोहरे के कारण फंस चुका था, लेकिन उसके बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बताया जा रहा है कि जिस बेसमेंट या अंडरपास में हादसा हुआ, वहां अक्सर पानी भरा रहता है। पास में खुला नाला है, लेकिन न तो वहां बैरिकेडिंग की गई थी और न ही रिफ्लेक्टर लगाए गए थे, जिससे रात के समय खतरे का अंदाजा लगाया जा सके।
युवराज मेहता की मौत अब केवल एक हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही, खराब इंफ्रास्ट्रक्चर और कमजोर आपदा प्रबंधन का प्रतीक बन गई है। सामने आए आखिरी वीडियो ने सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है और अब लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर इस मौत का जिम्मेदार कौन है।
Realme GT 6 भारत में लॉन्च होने की पुष्टि। अपेक्षित स्पेक्स, फीचर्स, और भी बहुत कुछ





