
New Delhi : दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता गुरुवार को इंदिरा गांधी दिल्ली महिला तकनीकी विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने स्नातक हो रही छात्राओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल पढ़ाई का अंत नहीं, बल्कि जीवन की नई शुरुआत है। छात्राओं से जिज्ञासा, नवाचार और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने तथा अपने ज्ञान और तकनीक का उपयोग समाज और देश के हित में करने का आह्वान किया।
समारोह में शिक्षा मंत्री आशीष सूद, विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. रंजना झा, शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दिन छात्राओं के जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि का प्रतीक है, जहां वर्षों की मेहनत, समर्पण और सपनों की सफलता का उत्सव मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यहां से डिग्री लेकर निकल रहीं 1,181 छात्राएं केवल डिग्री धारक नहीं, बल्कि आने वाले कल की भाग्यविधाता हैं, जो अपने ज्ञान, कौशल और नेतृत्व क्षमता से समाज और देश के भविष्य को दिशा देंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, स्टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया जैसे अभियानों ने युवाओं को नवाचार, शोध और उद्यमिता के नए अवसर प्रदान किए हैं। उन्होंने कहा कि आईजीडीटीयूडब्ल्यू इन राष्ट्रीय पहलों के साथ कदम से कदम मिलाकर काम करते हुए नारी सशक्तिकरण और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
रेखा गुप्ता ने कहा कि भारत ने महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में लंबा सफर तय किया है। बेटी बचाओ से बेटी पढ़ाओ और अब बेटी बढ़ाओ के संकल्प की दिशा में देश आगे बढ़ रहा है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि इंजीनियरिंग, प्रबंधन और विज्ञान जैसे क्षेत्रों में मिली उपलब्धियों पर रुकने के बजाय वे अपने करियर, परिवार और देश की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए निरंतर आगे बढ़ें।
उन्होंने वुमन-लेड डेवलपमेंट पर जोर देते हुए कहा कि महिलाएं अब केवल विकास की भागीदार नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता बन रही हैं। साहस और मेहनत का कोई जेंडर नहीं होता और इतिहास में हर क्षेत्र में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। दिल्ली सरकार शिक्षा, कौशल, तकनीक और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं शिक्षा और कौशल से सशक्त होती हैं तो न केवल उनका जीवन बदलता है, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास को भी नई दिशा मिलती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदिरा गांधी दिल्ली महिला तकनीकी विश्वविद्यालय महिलाओं के लिए तकनीकी शिक्षा का अग्रणी संस्थान बनकर उभरा है। यह संस्था इंजीनियरिंग, विज्ञान, वास्तुकला और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में महिलाओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और भविष्य की महिला वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, उद्यमियों और नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करने का सशक्त मंच है।
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह अवसर केवल डिग्री प्राप्त करने का नहीं, बल्कि दुनिया को यह संदेश देने का है कि आज की युवा महिलाएं भविष्य की निर्माता, नवप्रवर्तक और नेतृत्वकर्ता हैं। उन्होंने कहा कि आज देश की राजधानी का नेतृत्व एक महिला कर रही है, जो महिला सशक्तिकरण और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि भारत अमृत काल के दौर से गुजर रहा है और इस काल में महिलाओं की भागीदारी देश के विकास की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभर रही है। समाज में एक समय महिलाओं को पीछे रहने के लिए कहा जाता था, लेकिन आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी क्षमता और नेतृत्व का परिचय दे रही हैं। दिल्ली सरकार युवाओं, विशेषकर छात्राओं के लिए शिक्षा, नवाचार और उद्यमिता के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न कार्यक्रमों के अंतर्गत कुल 1,181 डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें 938 स्नातक, 212 स्नातकोत्तर और 31 पीएचडी डिग्रियां शामिल हैं। उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों और नेतृत्व क्षमता के लिए 2 चांसलर मेडल, 15 वाइस चांसलर मेडल और 26 उत्कृष्ट प्रदर्शन पुरस्कार भी प्रदान किए गए।