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MDR TB Treatment 2026: 6 माह में ठीक होगी ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी, कम खर्च में ज्यादा फायदा, आईसीएमआर अध्ययन

MDR TB Treatment 2026: 6 माह में ठीक होगी ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी, कम खर्च में ज्यादा फायदा, आईसीएमआर अध्ययन

नई दिल्ली, 12 फरवरी। मल्टी ड्रग-रेजिस्टेंट (MDR) और रिफैम्पिसिन-रेजिस्टेंट (RR) टीबी से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत की खबर है। अब इस जटिल प्रकार की टीबी का इलाज लंबे 9 से 20 महीनों तक नहीं चलेगा, बल्कि केवल 6 माह की ऑल-ओरल (सभी दवाएं मुंह से) उपचार पद्धति से संभव हो सकेगा। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के तहत नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन ट्यूबरक्लोसिस (एनआईआरटी) द्वारा किए गए अध्ययन में यह महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आया है। यह अध्ययन इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित हुआ है।

ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी वह स्थिति है, जिसमें सामान्य टीबी की दवाइयां प्रभावी नहीं रहतीं। अब तक ऐसे मरीजों को लंबे समय तक दवाइयां लेनी पड़ती थीं, जिनमें कई बार इंजेक्शन भी शामिल होते थे। इलाज लंबा होने के कारण मरीजों को दवाओं के गंभीर साइड इफेक्ट झेलने पड़ते थे और बीच में इलाज छोड़ देने की आशंका भी बनी रहती थी। इससे न केवल बीमारी बढ़ती थी, बल्कि संक्रमण फैलने का खतरा भी रहता था।

आईसीएमआर-एनआईआरटी के अध्ययन में पाया गया कि 6 माह का नया ऑल-ओरल रेजीमेन, जिसे बीपीएएल (BPaL) और बीपीएएलएम (BPaLM) कहा जाता है, अधिक प्रभावी और मरीजों के लिए सुविधाजनक है। इस पद्धति में इंजेक्शन की आवश्यकता नहीं होती, जिससे उपचार कम दर्दनाक और अधिक स्वीकार्य बनता है। अध्ययन के अनुसार, इस नए इलाज से मरीज जल्दी स्वस्थ होते हैं और उपचार के दौरान जटिलताएं भी कम होती हैं।

आर्थिक दृष्टि से भी यह उपचार लाभकारी साबित हुआ है। विश्लेषण के अनुसार, बीपीएएल रेजीमेन अधिक प्रभावी और लागत-बचत करने वाला है। प्रत्येक अतिरिक्त क्वालिटी एडजस्टेड लाइफ ईयर (QALY) के लिए स्वास्थ्य प्रणाली को प्रति मरीज लगभग 379 रुपये कम खर्च करने पड़ते हैं। वहीं बीपीएएलएम रेजीमेन में प्रति अतिरिक्त क्वालिटी एडजस्टेड लाइफ ईयर के लिए केवल 37 रुपये का अतिरिक्त खर्च आता है, जो लगभग लागत-तटस्थ है लेकिन प्रभावशीलता अधिक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई उपचार पद्धति देश के टीबी उन्मूलन लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कम अवधि, कम दुष्प्रभाव और कम खर्च—इन तीनों लाभों के कारण मरीजों में उपचार पूरा करने की संभावना बढ़ेगी। इससे संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने में मदद मिलेगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर आर्थिक बोझ भी कम होगा।

भारत ने 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। ऐसे में ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी के लिए प्रभावी, सुलभ और कम खर्चीला इलाज उपलब्ध होना इस दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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