
Faridabad Mosque Action: फरीदाबाद में मस्जिद पर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बढ़ा विवाद, विधायक आफताब अहमद ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
रिपोर्ट: संदीप चौहान
हरियाणा के Faridabad में मस्जिद पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक तरफ प्रशासन इस कार्रवाई को विकास कार्यों और नियमों के तहत उठाया गया कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी नेता और स्थानीय लोग इस पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। मामले को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्मा गया है और विभिन्न पक्षों की ओर से लगातार बयान सामने आ रहे हैं।
नूंह से विधायक Aftab Ahmed ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए सरकार और प्रशासन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। विधायक आफताब अहमद ने कहा कि विकास कार्यों के नाम पर धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। उन्होंने दावा किया कि वह कार्रवाई प्रभावित इलाके का दौरा करने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें मौके पर पहुंचने से पहले ही रोक दिया। विधायक ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए सरकार के रवैये पर सवाल खड़े किए।
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी कई चौंकाने वाले दावे सामने आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद अधिकारियों, कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों के मोबाइल फोन बंद करवा दिए गए थे। इसके साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि यदि किसी व्यक्ति ने कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग की थी तो उसे वीडियो हटाने के लिए कहा गया। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जानकारी के मुताबिक मस्जिद के साथ स्थित दो मकानों पर भी बुलडोजर कार्रवाई की गई। इसके अलावा मस्जिद से सटी राहुल कॉलोनी इलाके में पूरी रात भारी पुलिस बल तैनात रहा। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस द्वारा लगातार गश्त की जाती रही और इलाके में आम लोगों की आवाजाही को सीमित कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई शुरू होने से करीब दो घंटे पहले ही क्षेत्र में आने-जाने पर रोक लगा दी गई थी और किसी भी बाहरी व्यक्ति को मौके के आसपास नहीं जाने दिया गया।
घटना के बाद इलाके में तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट नजर आया। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। वहीं प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई नियमानुसार और विकास कार्यों को ध्यान में रखते हुए की गई है। अधिकारियों का दावा है that कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।
फिलहाल इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दल सरकार को घेरने में जुटे हैं, जबकि प्रशासन अपने कदम को वैधानिक बता रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर और अधिक तूल पकड़ सकता है।





