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मुख्यमंत्री का सिंगापुर दौरा : निवेश और कौशल विकास को मिलेगी नई गति

Lucknow News : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 22 से 24 फरवरी 2026 तक सिंगापुर की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस यात्रा का उद्देश्य उत्तर प्रदेश और सिंगापुर के बीच आर्थिक सहयोग, संस्थागत साझेदारी तथा विभिन्न क्षेत्रों में क्षेत्र विशेष सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करना है। यह दौरा भारत और सिंगापुर के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी रोडमैप के अनुरूप है, जिसमें आर्थिक सहयोग, डिजिटलाइजेशन, कौशल विकास, सतत विकास, कनेक्टिविटी और उन्नत विनिर्माण को प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में चिन्हित किया गया है।

उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य होने के साथ-साथ तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में भी अग्रणी है। वर्ष 2024-25 में राज्य की सकल राज्य घरेलू उत्पाद 30.25 लाख करोड़ रुपये रही है, जो 2025-26 में लगभग 36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। राज्य में डिजिटल सिंगल विंडो प्रणाली और क्षेत्र विशेष नीतियों सहित निवेशकों के लिए एक व्यापक और पारदर्शी सुविधा ढांचा उपलब्ध है, जो निवेश प्रस्तावों के त्वरित और सुगम क्रियान्वयन को सुनिश्चित करता है।

सिंगापुर भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सबसे बड़ा स्रोत है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान सिंगापुर से भारत को 14.94 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है। इस पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री की यह यात्रा उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश के लिए एक प्रतिस्पर्धी, भरोसेमंद और दीर्घकालिक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री अपनी यात्रा के दौरान सिंगापुर के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय बैठकें करेंगे। इनमें सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन शनमुगारत्नम, प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग, विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन, मानव संसाधन मंत्री तथा ऊर्जा एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी के प्रभारी मंत्री टैन सी लेंग शामिल हैं। इन बैठकों में भारत और सिंगापुर के बीच राष्ट्रीय स्तर पर तय सहयोग ढांचे को उत्तर प्रदेश में व्यावहारिक निवेश और परियोजना आधारित साझेदारी में बदलने पर विचार-विमर्श होगा।

इस यात्रा के दौरान प्रमुख संप्रभु और संस्थागत निवेशकों के साथ संवाद भी प्रस्तावित है। इनमें तामसेक और जीआईसी जैसे प्रतिष्ठित निवेशक शामिल हैं। इसके अतिरिक्त डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, एविएशन सेवाएं, वित्तीय सेवाएं और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों के साथ भी विस्तृत बैठकें होंगी।

इन क्षेत्रों पर रहेगा खास फोकस
मुख्यमंत्री के विदेश दौरे के दौरान इन क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया जाएगा।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर
सिंगापुर आधारित कंपनियां भारत में विशेष रूप से एआई सक्षम डिजिटल कैंपस के क्षेत्र में बहुवर्षीय विस्तार के दौर से गुजर रही हैं। इसके लिए उत्तर प्रदेश नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे जेवर के समीप उपलब्ध भूमि पार्सलों को हाइपरस्केल और एआई आधारित डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए संभावित निवेश स्थलों के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

एविएशन, एमआरओ और एयर कार्गो लॉजिस्टिक्स
नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विकास के साथ उत्तर प्रदेश सिंगापुर के एविएशन इकोसिस्टम के साथ साझेदारी की संभावनाएं तलाश रहा है। इस क्रम में सिंगापुर में एविएशन और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं का स्थल निरीक्षण भी यात्रा कार्यक्रम का हिस्सा है।

कौशल विकास और टीवीईटी सहयोग
मुख्यमंत्री की यात्रा में सिंगापुर के तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा इकोसिस्टम के साथ संवाद शामिल है, जिसमें आईटीई सिंगापुर भी सम्मिलित है। कौशल विकास भारत और सिंगापुर सहयोग का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है।

हरित ऊर्जा और औद्योगिक विकास
सतत विकास और हरित सप्लाई चेन के क्षेत्र में सिंगापुर की विशेषज्ञता उत्तर प्रदेश की नवीकरणीय ऊर्जा योजनाओं और एकीकृत औद्योगिक कॉरिडोर के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

सिंगापुर की धरती पर ‘इन्वेस्ट यूपी मेगा रोडशो’
सिंगापुर यात्रा का समापन ‘इन्वेस्ट यूपी मेगा रोडशो’ के साथ होगा, जिसमें डेटा सेंटर संचालक, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर, नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियां, प्राइवेट इक्विटी फंड और संप्रभु संपत्ति कोष एक मंच पर एकत्र होंगे। इस आयोजन के माध्यम से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, एविएशन आधारित औद्योगिक विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में निवेश के अवसर प्रस्तुत किए जाएंगे। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को भारत के भीतर एक प्रतिस्पर्धी, विस्तार योग्य और निवेश अनुकूल गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।

यह यात्रा उप राष्ट्रीय स्तर पर भारत और सिंगापुर के आर्थिक सहयोग के विस्तार में उत्तर प्रदेश की सक्रिय और अग्रणी भूमिका को दर्शाती है। उच्चस्तरीय संवाद को ठोस परियोजनाओं में परिवर्तित करने के लिए विधिवत फॉलो अप व्यवस्था, अकाउंट प्रबंधन और क्षेत्रीय टास्क फोर्स के गठन पर भी चर्चा होने की संभावना है।

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