
AI healthcare India: दो बार खांसिए और 8 मिनट में रिपोर्ट तैयार : All India Institute of Medical Sciences ने एआई ‘SWAASA’ को दी हरी झंडी
नई दिल्ली, 18 फरवरी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब स्वास्थ्य सेवाओं में नई क्रांति ला रहा है। All India Institute of Medical Sciences (एम्स) ने एआई आधारित एप ‘SWAASA’ को अस्थमा और सीओपीडी जैसे श्वसन रोगों की स्क्रीनिंग के लिए मंजूरी दे दी है। इस एप के जरिए अब तक करीब 460 मरीजों की सफल जांच की जा चुकी है। इसकी खासियत यह है कि मरीज को मोबाइल फोन के सामने केवल दो–तीन बार खांसना होता है और करीब 8 मिनट में रिपोर्ट तैयार हो जाती है।
एम्स के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के डॉ. हर्षल साल्वे ने बताया कि दिल्ली के Bharat Mandapam में आयोजित इंटरनेशनल एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में ‘SWAASA’ को इनोवेशन केस स्टडी के रूप में शामिल किया गया। यह एप खांसी की आवाज का विश्लेषण कर अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) की संभावना का आकलन करता है। इसे एक निजी कंपनी ने विकसित किया है और परीक्षण के बाद एम्स ने इसे स्क्रीनिंग के लिए हरी झंडी दी है।
एम्स में इस तकनीक को गोल्ड स्टैंडर्ड स्पाइरोमेट्री जांच के मुकाबले परखा गया। 460 मरीजों पर हुए अध्ययन में इसके परिणाम ‘मॉडरेट कोरिलेशन’ के साथ प्रभावी पाए गए। विशेषज्ञों के अनुसार यह एप खासतौर पर उन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और आउटरीच कैंपों के लिए उपयोगी है, जहां स्पाइरोमेट्री जैसी उन्नत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। एम्स के बल्लभगढ़ आउटरीच सेंटर में इसका उपयोग शुरू भी कर दिया गया है।
एप की प्रक्रिया बेहद सरल है। पहले मरीज की बुनियादी जानकारी और लक्षण दर्ज किए जाते हैं, फिर खांसी की रिकॉर्डिंग की जाती है। कुछ ही मिनटों में एआई एल्गोरिद्म विश्लेषण कर रिपोर्ट तैयार कर देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इसी तकनीक का उपयोग टीबी की स्क्रीनिंग के लिए भी किया जा सकता है। यदि यह सफल होता है, तो श्वसन रोगों की प्रारंभिक पहचान और समय पर उपचार में बड़ी उपलब्धि साबित होगी।





