Air Pollution: ग्रेटर नोएडा में प्रदूषण के अतिसंवेदनशील क्षेत्र बढ़कर 14 हुए
ग्रेटर नोएडा में वायु प्रदूषण की समस्या लगातार बनी हुई है। इस साल शहर में वायु प्रदूषण के लिहाज से अतिसंवेदनशील क्षेत्रों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है, जबकि पिछले साल ऐसे क्षेत्रों की संख्या नौ थी। खास बात यह है कि कई स्थान पिछले पांच वर्षों से लगातार अतिसंवेदनशील क्षेत्रों की सूची में शामिल हैं। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने वायु प्रदूषण के लिहाज से अतिसंवेदनशील क्षेत्रों की सूची ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को सौंप दी है।
प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने अतिसंवेदनशील क्षेत्रों के साथ-साथ अन्य इलाकों में भी पानी के छिड़काव और साफ-सफाई का अभियान तेज कर दिया है। इसके लिए अलग-अलग वर्क सर्किल के स्तर पर टीमें गठित की गई हैं। इन टीमों को सड़क की धूल नियंत्रित करने, सफाई व्यवस्था बेहतर करने और प्रदूषण बढ़ाने वाले कारकों पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी दी गई है।
वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में सड़कों से उड़ने वाली धूल, निर्माण और तोड़फोड़ के काम, टूटी तथा कच्ची सड़कें और यातायात जाम शामिल हैं। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में किसान चौक, मकोड़ा गोलचक्कर, तिलपता, एकमूर्ति गोलचक्कर और ऐस सिटी से 130 मीटर चौड़ी सड़क तक का क्षेत्र प्रदूषण के लिहाज से संवेदनशील माना गया है।
इसके अलावा साइट-3 अंडरपास रोड, सीआरपीएफ कैंप से फेस-2 डीएससी रोड, राइज गोलचक्कर से किसान चौक और निराला ग्रैंड सेक्टर-1 रोड भी सूची में शामिल हैं। निराला ग्रैंड सेक्टर-1 रोड पर टूटी सड़क को भी प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारणों में माना गया है। जलपुरा से गौड़ मलबेरी पुस्ता रोड को कच्ची सड़क होने के कारण संवेदनशील क्षेत्र में शामिल किया गया है। ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे से यमुना एक्सप्रेसवे लिंक रोड भी सूची में शामिल है।
प्राधिकरण के स्तर पर इन क्षेत्रों में पानी के छिड़काव और सफाई व्यवस्था को बढ़ाने के साथ ही सड़क और निर्माण गतिविधियों से पैदा होने वाली धूल को नियंत्रित करने पर जोर दिया जा रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निगरानी और आवश्यक कार्रवाई के लिए वर्क सर्किल स्तर पर टीमें सक्रिय की गई हैं।
वहीं, ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए प्रस्तावित नए एयर क्वालिटी इंडेक्स मॉनिटरिंग स्टेशनों की स्थापना में भी देरी हो रही है। अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल ग्रेटर नोएडा में दो वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन काम कर रहे हैं। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए हर पांच किलोमीटर के दायरे में एक निगरानी स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई गई है।
नोएडा एयरपोर्ट पर प्रस्तावित वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन का परीक्षण चल रहा है। इसके अलावा गौड़ यमुना सिटी, डीएमआईसीडीसी, शिव नादर यूनिवर्सिटी दादरी, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय और बादलपुर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क में भी निगरानी स्टेशन स्थापित किए जाने प्रस्तावित हैं। इन स्टेशनों के स्थापित होने के बाद अलग-अलग क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता की निगरानी और प्रदूषण के स्तर का आकलन अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।

