Extortion Case: बिल्डर को पिस्टल दिखाकर धमकाने और 15 करोड़ रुपये मांगने का आरोप, तीन लोगों पर FIR
नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे के पास जेपी ग्रीन्स स्पोर्ट्स सिटी में प्रोजेक्ट विकसित कर रही पिरामिड टाउनशिप्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अनिल कुमार वासवानी को कथित तौर पर पिस्टल दिखाकर धमकाने और 15 करोड़ रुपये की मांग करने का मामला सामने आया है। बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने अदालत के आदेश के बाद दिल्ली निवासी संजीव कुमार जैन, उनकी पत्नी समता जैन और गुरुग्राम निवासी कृष्ण चावला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता अनिल कुमार वासवानी के अनुसार, उनकी कंपनी के सभी शेयर 2 जनवरी 2024 को उनके नाम ट्रांसफर हो चुके थे। इसी दौरान संजीव कुमार जैन ने उनसे संपर्क कर दावा किया कि कृष्ण चावला, जो पहले कंपनी में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले साझेदार और प्रबंध निदेशक रह चुके हैं, ने कंपनी के कुछ फ्लैट जैन दंपती को देने की बात कही थी।
वासवानी का कहना है कि जब कंपनी के रिकॉर्ड की जांच की गई तो संजीव जैन और उनकी पत्नी समता जैन के नाम केवल दो यूनिट दर्ज मिलीं। शिकायत के मुताबिक, इन दोनों यूनिट के लिए वर्ष 2024 तक करीब 74.77 लाख रुपये की राशि जमा की जानी थी, लेकिन निर्धारित भुगतान नहीं किया गया।
भुगतान पूरा नहीं होने के कारण आवंटन-पत्र में दी गई शर्तों के अनुसार दोनों यूनिट का आवंटन निरस्त कर दिया गया। इसके बाद विवाद और बढ़ गया। आरोप है कि आवंटन रद्द होने के बाद संजीव जैन और समता जैन नॉलेज पार्क-2 स्थित कंपनी के कॉलेज कार्यालय पहुंचे और वहां अनिल वासवानी से बहस करने लगे।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जैन दंपती ने 28 यूनिट देने की मांग की। कथित तौर पर मांग पूरी नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। आरोप है कि बातचीत के दौरान अभद्र भाषा का भी इस्तेमाल किया गया और विवाद बढ़ता चला गया।
अनिल वासवानी के मुताबिक, इसके बाद संजीव कुमार जैन ने कथित तौर पर एक सप्ताह के भीतर 28 यूनिट या 15 करोड़ रुपये नकद देने की मांग की। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मांग पूरी नहीं करने पर वासवानी और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई।
आरोप यह भी है कि इस दौरान पिस्टल दिखाकर डराने की कोशिश की गई। घटना के बाद संजीव जैन और उनके साथ आए लोग वहां से चले गए। वासवानी ने उसी दिन पुलिस को शिकायत देकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और सुरक्षा तथा कानूनी कार्रवाई की मांग की।
शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रारंभ में पुलिस ने उनकी शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का रुख किया। अदालत के आदेश के बाद बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने तीनों नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की।
मामले में पुलिस अब शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की जांच कर रही है। जांच के दौरान कथित धमकी, 15 करोड़ रुपये की मांग, 28 यूनिट के विवाद और पिस्टल दिखाए जाने के आरोप से जुड़े साक्ष्यों को जुटाया जाएगा। पुलिस संबंधित दस्तावेजों, बातचीत और घटनास्थल से जुड़े अन्य तथ्यों की भी जांच कर सकती है।
कंपनी और जैन दंपती के बीच यूनिट के आवंटन तथा भुगतान को लेकर वास्तविक विवाद क्या है, इसे स्पष्ट करने के लिए संबंधित रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे। जांच में यह भी देखा जाएगा कि कृष्ण चावला की पूर्व हिस्सेदारी और प्रबंध निदेशक के तौर पर उनकी भूमिका का मौजूदा विवाद से क्या संबंध है।
पुलिस शिकायत में लगाए गए धमकी और रंगदारी जैसे आरोपों की भी स्वतंत्र रूप से जांच करेगी। किसी भी आरोप की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी। फिलहाल प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ गई है।
बीटा-2 थाना प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों और पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है।
फिलहाल मामला कंपनी के फ्लैट आवंटन और भुगतान से जुड़े विवाद से शुरू होकर कथित धमकी और 15 करोड़ रुपये की मांग तक पहुंच गया है। पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और विवाद में शामिल लोगों की वास्तविक भूमिका क्या रही है।

