Priesthood Course: हिमाचल के संस्कृत महाविद्यालयों में शुरू हो सकते हैं कर्मकांड पुरोहित कोर्स, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम पर सरकार करेगी विचार
शिमला, 31 अगस्त। हिमाचल प्रदेश के सरकारी संस्कृत महाविद्यालयों में कर्मकांड और पुरोहित प्रशिक्षण से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश ब्राह्मण कल्याण बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राज्य सरकार संस्कृत महाविद्यालयों में कर्मकांड पुरोहित कोर्स की कक्षाएं शुरू करने पर विचार करेगी। इसके तहत डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने की संभावनाओं पर काम किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बैठक में सामाजिक सामंजस्य और भाईचारे के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सामंजस्य और भाईचारे से ही आदर्श समाज का निर्माण संभव है, क्योंकि इससे सामाजिक एकता मजबूत होती है। शांति, सद्भाव और सहयोग का वातावरण किसी भी समाज की प्रगति और समृद्धि के लिए मजबूत आधार तैयार करता है।
बैठक के दौरान प्रदेश में बेसहारा गौवंश के संरक्षण को लेकर किए जा रहे कार्यों की भी जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में 222 गौ सदन और गौ अभयारण्य संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें 23,018 गौवंश को आश्रय दिया गया है।
उन्होंने बताया कि सात अन्य गौ सदनों और गौ अभयारण्यों का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद प्रदेश में करीब 2,200 से 2,500 अतिरिक्त बेसहारा गौवंश को आश्रय देने की क्षमता विकसित हो जाएगी।
मुख्यमंत्री के मुताबिक गौ सेवा आयोग की ओर से गौ सदनों और गौ अभयारण्यों में रखे गए बेसहारा गौवंश के पालन-पोषण के लिए प्रतिमाह 1,200 रुपये प्रति गौवंश की सहायता राशि उपलब्ध कराई जा रही है।
प्रदेश में बेसहारा पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में भी सरकार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके लिए राज्य स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इसका उद्देश्य बेसहारा पशुओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न स्तरों पर बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के समग्र विकास के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को लागू कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क सहित अलग-अलग क्षेत्रों में ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के ध्येय के साथ कई पहल की जा रही हैं।
बैठक में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं का भी उल्लेख किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त दवाइयां, निःशुल्क जांच और आवश्यक मशीनरी एवं उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्रीय अस्पतालों, नागरिक अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 484 प्रकार की दवाइयों और 134 उपभोग्य वस्तुओं को आवश्यक सूची में शामिल किया है।
इसी तरह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 170 प्रकार की दवाइयां और 48 उपभोग्य वस्तुएं तथा उप स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 91 प्रकार की दवाइयां और 28 उपभोग्य वस्तुएं आवश्यक दवाइयों की सूची में अधिसूचित की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वास्थ्य संस्थानों में इनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 573 प्रकार की दवाइयां और उपभोग्य वस्तुएं राज्य दर संविदा के तहत उपलब्ध हैं। इसके अलावा 866 प्रकार की दवाइयां और उपभोग्य वस्तुएं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के माध्यम से उपलब्ध हैं।
सरकारी अस्पतालों में नैदानिक जांच सुविधाओं को लेकर भी बैठक में जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने ई-निविदा के माध्यम से निजी क्षेत्र की कंपनी करसना डायग्नोस्टिक्स के जरिए विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में प्रयोगशाला जांच की सुविधा उपलब्ध कराई है।
इसके तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 63, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 96, नागरिक अस्पतालों में 110 तथा जोनल और क्षेत्रीय अस्पतालों में 133 प्रयोगशालाओं के माध्यम से मरीजों को निःशुल्क जांच की सुविधा दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और प्रयोगशाला जांच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
बैठक के दौरान जिला मंडी स्थित त्रिवेणी धाम रिवालसर से जुड़े विकास कार्य पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि त्रिवेणी धाम रिवालसर की परिक्रमा की क्षतिग्रस्त और गिरने के खतरे वाली चारदीवारी के पुनर्निर्माण के लिए 1.28 करोड़ रुपये का प्राकलन तैयार किया गया है।
इसके अलावा बैठक में डॉ. वाईएस परमार ऋण योजना, सीबीएसई पाठ्यक्रम वाले विद्यालयों सहित विभिन्न योजनाओं और विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। ब्राह्मण कल्याण बोर्ड के सदस्यों की ओर से प्रस्तुत विभिन्न मुद्दों पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान प्रदेश में मादक पदार्थ ‘चिट्टा’ के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक जन-जागरूकता अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से नशे के खिलाफ राज्य सरकार की मुहिम में सक्रिय सहयोग करने की अपील की।
बैठक में सचिव सामान्य प्रशासन आशीष सिंहमार ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और उन्हें ब्राह्मण कल्याण बोर्ड की कार्यप्रणाली से अवगत कराया। विशेष सचिव हरबंस सिंह ब्रसकोन ने बैठक की कार्यवाही का संचालन किया।
इस अवसर पर मुख्य सचिव केके पंत, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, अतिरिक्त मुख्य सचिव, विभिन्न विभागों के प्रशासनिक सचिव, ब्राह्मण कल्याण बोर्ड के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


