Shop Booking Dispute: ग्रेनो वेस्ट में दुकान बुक कराकर पैसे हड़पने का आरोप, अदालत ने परिवाद दर्ज करने का दिया आदेश
नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के नॉलेज पार्क-5 में दुकान बुक कराने के बाद लाखों रुपये फंसने के मामले में अदालत ने पीड़ित के प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने मामले में पीड़ित को अपने साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर देते हुए बयान दर्ज कराने के लिए 18 सितंबर की तारीख तय की है।
कृष्ण कुमार की ओर से अदालत में दाखिल प्रार्थना पत्र के मुताबिक आधार इन्फ्रा होल्डिंग लिमिटेड और उसके निदेशक के साथ 25 अप्रैल 2016 को एक दुकान खरीदने का करार हुआ था। यह दुकान ग्रेटर नोएडा वेस्ट के नॉलेज पार्क-5 स्थित एक परियोजना के ग्राउंड फ्लोर पर प्रस्तावित थी।
प्रार्थना पत्र में बताया गया कि दुकान का क्षेत्रफल 214 वर्गफुट था और इसकी कुल कीमत 18 लाख रुपये तय की गई थी। करार के बाद कृष्ण कुमार ने दुकान की बुकिंग के एवज में नौ लाख रुपये की राशि चेक के माध्यम से एडवांस के रूप में जमा कराई थी।
आरोप है कि एडवांस राशि लेने के बावजूद कंपनी की ओर से न तो निर्धारित दुकान का कब्जा दिया गया और न ही उसकी रजिस्ट्री कराई गई। लंबे समय तक दुकान नहीं मिलने के कारण खरीदार की रकम फंसी रही।
पीड़ित का आरोप है कि 11 अक्टूबर 2018 को कंपनी की तरफ से उसे दुकान की बुकिंग निरस्त करने का पत्र भेज दिया गया। हालांकि बुकिंग रद्द किए जाने के बावजूद एडवांस के रूप में जमा कराए गए नौ लाख रुपये वापस नहीं किए गए।
रकम वापस नहीं मिलने पर कृष्ण कुमार ने उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण यानी यूपी रेरा का दरवाजा खटखटाया। प्रार्थना पत्र के अनुसार रेरा में शिकायत करने के बाद जानकारी सामने आई कि जिस परियोजना में दुकान बुक कराई गई थी, वह प्रोजेक्ट रेरा में पंजीकृत ही नहीं था।
इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा और पीड़ित की ओर से प्रार्थना पत्र दाखिल कर कार्रवाई की मांग की गई। न्यायालय ने मामले से जुड़े तथ्यों और प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की।
सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि मौजूदा स्तर पर मामले में पुलिस विवेचना की आवश्यकता नहीं है। पीड़ित को अपने आरोपों के समर्थन में उपलब्ध साक्ष्य सीधे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाना उचित होगा।
इसके बाद अदालत ने कृष्ण कुमार की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया। मामले में अगली प्रक्रिया के तहत पीड़ित का बयान दर्ज किया जाएगा। इसके लिए अदालत ने 18 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।
अब पीड़ित को न्यायालय के समक्ष अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। इसके बाद अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और बयानों के आधार पर मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करेगी।


