AIIMS Breakthrough ऑस्टियोपोरोसिस के इलाज में बड़ी खोज, DCA से हड्डियों के नुकसान पर लगेगी रोक

AIIMS Breakthrough ऑस्टियोपोरोसिस के इलाज में बड़ी खोज, DCA से हड्डियों के नुकसान पर लगेगी रोक
नई दिल्ली स्थित All India Institute of Medical Sciences (एम्स) के वैज्ञानिकों ने ‘ऑस्टियोपोरोसिस’ और सूजन से होने वाले हड्डियों के नुकसान के इलाज की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल Biomedicine and Pharmacotherapy में प्रकाशित हुआ है, जिसमें डिऑक्सी कॉलिक एसिड (DCA) को हड्डियों की सेहत के लिए प्रभावी बताया गया है।
शोध में पाया गया कि शरीर में बढ़ती सूजन और आंतों के माइक्रोबायोटा का असंतुलन हड्डियों को तेजी से कमजोर करता है, जिससे Osteoporosis का खतरा बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार DCA इस प्रक्रिया को नियंत्रित कर हड्डियों को नुकसान से बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
अध्ययन के दौरान यह सामने आया कि DCA हड्डियों की मिनरल डेंसिटी और संरचना में सुधार करता है। यह हड्डियों को नुकसान पहुंचाने वाली ऑस्टियोक्लास्ट कोशिकाओं की गतिविधि को कम करता है और हड्डी बनाने वाली ऑस्टियोब्लास्ट कोशिकाओं को सक्रिय कर संतुलन स्थापित करता है। इससे हड्डियों की मजबूती बनी रहती है और टूटने का खतरा घटता है।
इसके अलावा DCA आंतों की दीवार को मजबूत करता है और माइक्रोबायोटा के असंतुलन को ठीक करने में मदद करता है। यह शरीर में सूजन बढ़ाने वाले तत्वों जैसे IL-17, TNF-α और IL-6 को कम करता है, जबकि एंटी-इन्फ्लेमेटरी साइटोकाइन्स को बढ़ाता है। यह पूरा प्रभाव ‘गट-बोन कनेक्शन’ के जरिए TGR5 और FXR रिसेप्टर्स को सक्रिय कर हासिल होता है, जो हड्डियों को सुरक्षित रखने में सहायक होते हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज भविष्य में ऑस्टियोपोरोसिस और अन्य सूजन जनित हड्डी रोगों के इलाज के लिए नई और प्रभावी दवाएं विकसित करने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। इस शोध में सुमेधा यादव, स्वाति राजपूत, चमन सैनी, मेघा शर्मा, प्रद्युम्न के. मिश्रा और रुपेश के. श्रीवास्तव सहित वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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