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Defence Innovation India: एमएसएमई और स्टार्टअप्स बने रक्षा निर्माण के ‘ब्रांड एंबेसडर’, सम्मेलन में आधुनिक तकनीकों पर मंथन

Defence Innovation India: एमएसएमई और स्टार्टअप्स बने रक्षा निर्माण के ‘ब्रांड एंबेसडर’, सम्मेलन में आधुनिक तकनीकों पर मंथन

नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन 2026 में भारत के रक्षा क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव और नवाचार की झलक देखने को मिली। संजय सेठ ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि एमएसएमई, स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं और यही वर्ग भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण हब बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।

Manekshaw Centre में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा उत्पादन में उद्योग की भागीदारी को लेकर गहन चर्चा हुई। कार्यक्रम में डीपीएसयू, निजी रक्षा कंपनियों, एमएसएमई, नीति-निर्माताओं, इनोवेटर्स और शिक्षाविदों ने भाग लिया और भविष्य की रक्षा तकनीकों पर विचार साझा किए।

सम्मेलन के दौरान आर्टिलरी गन, छोटे हथियार, रक्षा धातुकर्म, एडवांस मैटेरियल्स, नौसैनिक तकनीक, आर्मर्ड व्हीकल्स, मिसाइल सिस्टम और एयर डिफेंस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विस्तार से मंथन किया गया। इसके अलावा स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्री 4.0, गाइडेंस-नेविगेशन सिस्टम, प्रोपल्शन और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग जैसे उभरते क्षेत्रों को भी प्रमुखता से उठाया गया, जो आने वाले समय में रक्षा उत्पादन को नई दिशा दे सकते हैं।

रक्षा राज्य मंत्री ने विश्वास जताया कि भारत वर्ष 2030 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात और 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन का लक्ष्य हासिल कर लेगा। इस अवसर पर संजीव कुमार भी मौजूद रहे।

सम्मेलन के साथ आयोजित प्रदर्शनी में 20 से अधिक बड़ी रक्षा कंपनियों और 24 भारतीय व अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने अपनी आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और स्मार्ट मैटेरियल्स जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल रहीं, जो भविष्य के युद्ध और सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती हैं।

इस सम्मेलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसमें एमएसएमई व स्टार्टअप्स की भूमिका निर्णायक बनने जा रही है।

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