Shoaib Jamai Statement Controversy: डॉ. शोएब जमाई के बयान पर आचार्य विक्रमादित्य की प्रतिक्रिया, सड़क पर नमाज़ को लेकर उठे सवाल

Shoaib Jamai Statement Controversy: डॉ. शोएब जमाई के बयान पर आचार्य विक्रमादित्य की प्रतिक्रिया, सड़क पर नमाज़ को लेकर उठे सवाल

रिपोर्ट: रवि डालमिया

देश में सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब Shoaib Jamai ने एक बयान में कहा कि अगर सार्वजनिक स्थलों और सड़कों पर पूरे दिन होली खेली जा सकती है तो मस्जिदों में जगह कम पड़ने की स्थिति में सड़क पर 15 मिनट की नमाज़ पढ़ने पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है।

इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए Acharya Vikramaditya ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि सड़कें आम लोगों के आवागमन और यात्रा के लिए बनाई जाती हैं, न कि धार्मिक गतिविधियों के लिए। उनका कहना था कि न तो सड़क पर खड़े होकर होली खेली जाती है और न ही सड़क किसी प्रकार की इबादत या पूजा-अर्चना की जगह है।

आचार्य विक्रमादित्य ने कहा कि नमाज़ और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहले से ही निर्धारित स्थान मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि नमाज़ पढ़ने के लिए मस्जिद, ईदगाह, मदरसे और घर जैसे स्थान उपलब्ध हैं, जहां लोग अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार बिना किसी बाधा के इबादत कर सकते हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शोएब जमाई जैसे लोग इस तरह के बयान देकर देश के लोगों के बीच विवाद और तनाव पैदा करने की कोशिश करते हैं। उनका कहना था कि सड़कों पर नमाज़ पढ़ने से आम जनता को असुविधा हो सकती है, क्योंकि सड़कों पर लगातार वाहनों का आवागमन रहता है और यातायात बाधित हो सकता है।

आचार्य विक्रमादित्य ने यह भी कहा कि सड़कें स्वच्छ या धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उपयुक्त स्थान नहीं होतीं। उनके अनुसार सड़कों पर लोग थूकते हैं, कूड़ा फेंकते हैं और कई तरह की गतिविधियां होती रहती हैं, इसलिए वहां धार्मिक कार्य करना उचित नहीं माना जा सकता।

उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि क्या कहीं भी ऐसा स्पष्ट प्रावधान है जो सड़कों पर नमाज़ पढ़ने की अनुमति देता हो। उन्होंने कहा कि कई लोग यह दावा करते हैं कि संविधान इसकी अनुमति देता है, लेकिन यह स्पष्ट होना चाहिए कि ऐसा प्रावधान किस अनुच्छेद में मौजूद है।

आचार्य विक्रमादित्य ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक और विविधता वाला देश है, जहां सभी धर्मों को अपने धार्मिक अनुष्ठान करने की पूरी स्वतंत्रता है। लेकिन यह भी जरूरी है कि सार्वजनिक व्यवस्था और आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए धार्मिक गतिविधियां तय स्थानों पर ही की जाएं।

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