Induction Cooktop Demand: गैस संकट के बीच नोएडा में इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री 60 प्रतिशत बढ़ी

Induction Cooktop Demand: गैस संकट के बीच नोएडा में इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री 60 प्रतिशत बढ़ी

नोएडा और दिल्ली-एनसीआर के बाजारों में इंडक्शन कुकटॉप की मांग तेजी से बढ़ने लगी है। खाड़ी देशों में एलपीजी सप्लाई में आ रही रुकावटों के कारण गैस सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है, जिसके चलते लोग अब वैकल्पिक साधनों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी वजह से शहर के बाजारों में इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री में करीब 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

बाजार से जुड़े व्यापारियों के अनुसार पिछले तीन दिनों में इंडक्शन कुकटॉप की खरीदारी में अचानक तेजी आई है। Sector 18 Market Association के अध्यक्ष सुशील कुमार जैन ने बताया कि व्यापारी और घरों में रहने वाले लोग एलपीजी की खपत कम करने और कामकाज बिना रुकावट जारी रखने के लिए इलेक्ट्रिक इंडक्शन कुकिंग को अपनाने लगे हैं। इसी कारण बाजारों में इनकी मांग तेजी से बढ़ी है।

व्यापारियों के मुताबिक इंडक्शन कुकटॉप ऊर्जा की दृष्टि से भी ज्यादा प्रभावी माने जाते हैं। सुशील कुमार जैन ने बताया कि इंडक्शन कुकटॉप लगभग 90 से 92 प्रतिशत तक ऊर्जा दक्षता देते हैं, जबकि एलपीजी की ऊर्जा दक्षता लगभग 50 से 60 प्रतिशत तक मानी जाती है। ऐसे में इंडक्शन के उपयोग से ऊर्जा खपत कम होती है और खर्च में भी कमी आती है। उनका कहना है कि यदि कमर्शियल किचन में इंडक्शन का उपयोग किया जाए तो ऊर्जा बिल में करीब 40 प्रतिशत तक की कमी संभव है।

बढ़ती मांग का असर ऑनलाइन बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। कई ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर नामी कंपनियों के इंडक्शन कुकटॉप फिलहाल आउट ऑफ स्टॉक हो गए हैं। हालांकि स्थानीय कंपनियों के इंडक्शन कुकटॉप बाजार में उपलब्ध हैं और उनकी बिक्री भी तेजी से हो रही है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक स्टोव की मांग भी तेजी से बढ़ी है, जो बाजार में लगभग 3000 से 5000 रुपये तक की कीमत में मिल रहे हैं।

व्यापारियों का कहना है कि शहरी इलाकों में पहले से ही करीब 12 से 15 प्रतिशत घरों में इंडक्शन कुकटॉप को बैकअप के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। गैस सिलेंडर की देरी या आपात स्थिति में लोग इसका उपयोग पानी उबालने, चाय बनाने और जल्दी तैयार होने वाले भोजन पकाने के लिए करते हैं। मौजूदा हालात में एलपीजी को लेकर जमाखोरी और संभावित कीमत वृद्धि की आशंका के चलते भी लोग इंडक्शन जैसे विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।

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