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Noida: हादसे के चार दिन बाद भी पानी में फंसी इंजीनियर युवराज की कार, निकालने को लेकर पुलिस की नई तैयारी

Noida: हादसे के चार दिन बाद भी पानी में फंसी इंजीनियर युवराज की कार, निकालने को लेकर पुलिस की नई तैयारी

नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के चार दिन बाद भी उनकी कार पानी से भरे गहरे गड्ढे में फंसी हुई है। घटना के करीब साढ़े चार घंटे बाद बचाव दल ने युवराज का शव तो बरामद कर लिया था, लेकिन कार अब तक बाहर नहीं निकाली जा सकी है। कार किस स्थिति में है और गड्ढे के भीतर कहां फंसी है, इसकी सटीक जानकारी अभी तक जांच टीम को नहीं मिल पाई है। अब पुलिस ने कार की तलाश और उसे बाहर निकालने के लिए आधुनिक सोनार तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है।

यह हादसा 16 जनवरी की रात करीब 12 बजे हुआ था, जब युवराज की कार नाले की दीवार तोड़ते हुए एक निर्माणाधीन मॉल के पास करीब 50 फीट गहरे गड्ढे में जा गिरी थी। उस गड्ढे में भारी मात्रा में पानी भरा हुआ था। पुलिस, दमकल विभाग और एनडीआरएफ की टीम ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, लेकिन जब तक युवराज को बाहर निकाला गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। इसके बाद से कार उसी गहरे पानी भरे गड्ढे में डूबी हुई है।

हैरानी की बात यह है कि हादसे के तीन से चार दिन बाद भी कार को निकालने में सफलता नहीं मिल सकी है। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और दमकल विभाग ने कार निकालने की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया है। इन विभागों का कहना है कि उनका दायरा केवल व्यक्ति को बचाने या शव को निकालने तक सीमित है, डूबी हुई गाड़ियों को निकालना उनकी जिम्मेदारी नहीं है। इसके बाद यह जिम्मेदारी पूरी तरह से स्थानीय पुलिस पर आ गई है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गड्ढे में भरा पानी बेहद गंदा है, नीचे अर्धनिर्मित बीम में निकले हुए सरिये लगे हैं, बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है और जमीन दलदली है। इन परिस्थितियों में कार तक पहुंचना बेहद जोखिम भरा साबित हो रहा है। गोताखोरों को भी नीचे उतारा गया, लेकिन सीमित दृश्यता और जानलेवा सरियों की वजह से वे ज्यादा अंदर तक नहीं जा सके।

अब पुलिस ने कार की सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए सोनार तकनीक के इस्तेमाल का निर्णय लिया है। यह तकनीक फिलहाल नोएडा पुलिस के पास उपलब्ध नहीं है। इसके लिए लखनऊ मुख्यालय से संपर्क किया गया है और विशेषज्ञों को बुलाने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही नोएडा प्राधिकरण को गड्ढे में भरे पानी को निकालने के लिए पंप सेट लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि रेस्क्यू और रिकवरी का काम आसान हो सके।

उच्च अधिकारियों का कहना है कि राहत और बचाव कार्य के दौरान सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता रही। गड्ढे के अंदर निकले हुए सरिये किसी भी रेस्क्यूकर्मी के लिए जानलेवा साबित हो सकते थे। ऊपर से जमीन भी दलदली होने के कारण किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता था। इन्हीं चुनौतियों के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।

पुलिस अधिकारियों ने यह भी बताया कि भविष्य में ऐसे हादसों से निपटने के लिए जिले में चार जल चौकी स्थापित करने का प्रस्ताव पहले ही शासन को भेजा जा चुका है, ताकि पानी से जुड़े हादसों में तेजी से और सुरक्षित तरीके से कार्रवाई की जा सके।

सोनार तकनीक की बात करें तो यह साउंड नेविगेशन एंड रेंजिंग सिस्टम पर आधारित होती है। इसमें पानी के भीतर ध्वनि तरंगें भेजी जाती हैं, जो किसी वस्तु से टकराकर वापस लौटती हैं। इन तरंगों के आधार पर पानी में डूबी वस्तु की दूरी, दिशा और स्थिति का पता लगाया जाता है। इसी तकनीक के जरिए युवराज की कार की सटीक लोकेशन चिन्हित कर उसे बाहर निकालने की तैयारी की जा रही है।

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