First Rehab Foundation: दिव्यांग बच्चों की अनोखी पहल, पुराने पोस्टर्स से बने वॉटरप्रूफ ब्लैंकेट जरूरतमंदों में बांटे

First Rehab Foundation: दिव्यांग बच्चों की अनोखी पहल, पुराने पोस्टर्स से बने वॉटरप्रूफ ब्लैंकेट जरूरतमंदों में बांटे
रिपोर्ट: अजीत कुमार
नोएडा में फर्स्ट रिहैब फाउंडेशन के दिव्यांग बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। बच्चों ने पुराने और बेकार हो चुके पोस्टर्स को दोबारा उपयोग में लाते हुए उन्हें वॉटरप्रूफ ब्लैंकेट में बदल दिया, जिन्हें सर्दियों के मौसम में जरूरतमंद लोगों को वितरित किया गया। इस अनोखी पहल के तहत बच्चों ने पोस्टर्स को आपस में सिच कर मजबूत और उपयोगी ब्लैंकेट तैयार किए, जो बारिश और ठंड दोनों से बचाव में सहायक हैं। शुक्रवार को इस अभियान के दौरान कुल 160 वॉटरप्रूफ ब्लैंकेट जरूरतमंद लोगों के बीच बांटे गए।
यह पूरी पहल फर्स्ट रिहैब फाउंडेशन सेक्टर 70 में शिक्षक इलिका रावत और प्रशासन प्रमुख कृष्णा यादव के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। फाउंडेशन के बच्चों ने इस रचनात्मक कार्य के माध्यम से यह साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों के बावजूद सकारात्मक सोच और मेहनत से समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। इस प्रयास से जहां एक ओर वेस्ट मटेरियल का पुनः उपयोग कर पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में कदम बढ़ाया गया, वहीं दूसरी ओर सर्दी के मौसम में बेसहारा और जरूरतमंद लोगों को राहत भी मिली।
फाउंडेशन का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों के साथ मिलकर काम करना और उनकी जरूरतों को समझते हुए सहयोग प्रदान करना है। इस पहल ने न केवल जरूरतमंदों की मदद की, बल्कि बच्चों के भीतर सामाजिक जिम्मेदारी और आत्मविश्वास की भावना को भी मजबूत किया। सेंटर मैनेजर सुरभि जैन ने बताया कि इस तरह की गतिविधियों से बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया जा रहा है, जिससे वे स्वयं को समाज का सक्रिय और जिम्मेदार हिस्सा महसूस कर सकें।
इस अवसर पर फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. महिपाल सिंह, डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव और डॉ. सुष्मिता भाटी ने बच्चों के कार्य की सराहना की और उन्हें प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज के जरूरतमंद लोगों को सीधी राहत पहुंचाने का कार्य भी करती है। फाउंडेशन के इस प्रयास से बच्चों को यह सीख मिलती है कि वे अपने छोटे-छोटे प्रयासों से भी समाज में बड़ा योगदान दे सकते हैं।





