Noida Kiosk Project: बॉटनिकल गार्डन के सामने कियोस्क संचालन के लिए कोई एजेंसी नहीं आई आगे

Noida Kiosk Project: बॉटनिकल गार्डन के सामने कियोस्क संचालन के लिए कोई एजेंसी नहीं आई आगे

सेक्टर-18 में दो आवेदन, प्राधिकरण बढ़ाएगा आरएफपी की अंतिम तिथि
नोएडा प्राधिकरण द्वारा सेक्टर-38ए बॉटनिकल गार्डन और जीआईपी मॉल के बीच बनाए गए कियोस्क (Kiosk) के संचालन के लिए जारी रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) पर अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली है। बॉटनिकल गार्डन के सामने बनाए गए 19 कियोस्क के लिए एक भी एजेंसी आगे नहीं आई, जबकि सेक्टर-18 स्थित 15 कियोस्क के लिए केवल दो एजेंसियों ने आवेदन किया है। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी आवंटन प्रक्रिया के लिए कम से कम तीन एजेंसियों के आवेदन जरूरी हैं। ऐसे में अब आरएफपी की अंतिम तिथि बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

कम आवेदन के पीछे सख्त शर्तें और ऊंची धरोहर राशि कारण
नोएडा प्राधिकरण ने 18 अक्टूबर को कियोस्क संचालन के लिए आरएफपी जारी की थी, जिसकी अंतिम तिथि 7 नवंबर तय थी। अधिकारियों के अनुसार, आवेदन की संख्या कम आने के पीछे कई कारण हैं — एजेंसियों के लिए रखी गई कड़ी शर्तें, उच्च धरोहर राशि और संपूर्ण कियोस्क संचालन का जिम्मा एक ही एजेंसी को देना। इन कारणों से कई संभावित एजेंसियों ने आवेदन करने से परहेज किया।

सेक्टर-18 और बॉटनिकल गार्डन में अलग-अलग किराया निर्धारण
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि सेक्टर-18 में 15 और सेक्टर-38ए में 19 कियोस्क बनाए गए हैं। इनमें से 10 से अधिक कियोस्क खाने-पीने के आउटलेट्स के लिए आरक्षित हैं, जबकि बाकी अन्य प्रकार के व्यवसायों के लिए होंगे।
सेक्टर-38ए के कियोस्क का वार्षिक शुरुआती किराया ₹1,28,25,600 रुपये तय किया गया है, जबकि सेक्टर-18 के लिए यह ₹1,17,60,000 रुपये रखा गया है। इसके अलावा, चयनित एजेंसी को तीन महीने के बराबर सुरक्षा राशि जमा करनी होगी और हर साल 10 प्रतिशत किराया वृद्धि भी लागू होगी।

प्राधिकरण की योजना: आम जनता को नहीं, केवल एजेंसियों को आवंटन
प्राधिकरण का उद्देश्य यह है कि कियोस्क सीधे आम लोगों को नहीं बल्कि एजेंसियों को आवंटित किए जाएं ताकि बेहतर प्रबंधन और निगरानी सुनिश्चित हो सके। आवेदन करने वाली एजेंसियों को सेक्टर-18 के लिए करीब ₹11 लाख और सेक्टर-38ए के लिए ₹12 लाख की धरोहर राशि जमा करनी होती है। यह राशि कई एजेंसियों के लिए चुनौती साबित हो रही है।
प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आवेदन की संख्या बढ़ाने के लिए अब आरएफपी की समयसीमा बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। साथ ही, शर्तों की समीक्षा भी की जा सकती है ताकि अधिक एजेंसियां आगे आकर भाग ले सकें।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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