E-Way Bill Update: 15 जून से बदल जाएगी ई-वे बिल प्रणाली, व्यापारियों और उद्यमियों को करना होगा सॉफ्टवेयर अपडेट
E-Way Bill Update: 15 जून से बदल जाएगी ई-वे बिल प्रणाली, व्यापारियों और उद्यमियों को करना होगा सॉफ्टवेयर अपडेट
व्यापारियों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के अंतर्गत ई-वे बिल प्रणाली में 15 जून से कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं। इन परिवर्तनों को देखते हुए राज्य कर विभाग ने व्यापारियों और उद्योग जगत से जुड़े लोगों को समय रहते अपने सॉफ्टवेयर और सिस्टम अपडेट करने की सलाह दी है, ताकि माल परिवहन के दौरान किसी प्रकार की परेशानी, जुर्माने या माल रुकने जैसी स्थिति का सामना न करना पड़े। गौतमबुद्ध नगर जोन के राज्य कर विभाग द्वारा सेक्टर-148 स्थित कार्यालय में आयोजित व्यापारी संवाद कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने नई व्यवस्था की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि ई-वे बिल प्रणाली में होने वाले बदलावों का उद्देश्य माल परिवहन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना, कर चोरी पर रोक लगाना तथा फर्जी लेनदेन को नियंत्रित करना है। अधिकारियों के अनुसार, 15 जून से लागू होने वाले प्रमुख बदलावों में ‘शिप-टू’ जीएसटी नंबर को अनिवार्य किया गया है। अब यदि किसी लेनदेन में माल किसी अन्य स्थान पर भेजा जा रहा है, तो माल प्राप्त करने वाले का जीएसटी नंबर दर्ज करना जरूरी होगा। यदि माल किसी अपंजीकृत व्यक्ति या स्थान पर भेजा जा रहा है, तो ई-वे बिल में स्पष्ट रूप से “अनरजिस्टर्ड पर्सन” या संबंधित विवरण दर्ज करना होगा। इसके अलावा ई-वे बिल क्लोजर की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत माल की डिलीवरी पूरी होने के बाद ई-वे बिल को निर्धारित समय सीमा के भीतर बंद करना अनिवार्य होगा। यह प्रक्रिया डिलीवरी वाले दिन या उसके अगले दिन तक पूरी करनी होगी। इससे माल की वास्तविक आवाजाही की निगरानी और अधिक प्रभावी हो सकेगी। राज्य कर विभाग के अधिकारियों ने कहा कि सभी उद्यमी, व्यापारी और कारोबारी संस्थान अपने अकाउंटिंग एवं बिलिंग सॉफ्टवेयर को समय रहते अपडेट कर लें, ताकि ई-वे बिल जनरेट करने या बंद करने में किसी तरह की तकनीकी समस्या न आए। विभाग का मानना है कि नई प्रणाली से माल की ट्रैकिंग बेहतर होगी, फर्जी बिलिंग पर रोक लगेगी और कर संग्रह व्यवस्था अधिक मजबूत बनेगी। व्यापारी संवाद कार्यक्रम में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने अपनी विभिन्न समस्याएं भी अधिकारियों के समक्ष रखीं। उद्यमियों ने कोरोगेटेड बॉक्स उद्योग में कच्चे माल और तैयार उत्पाद पर लगने वाले जीएसटी के अंतर को समाप्त करने की मांग की। साथ ही इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) रिफंड में आ रही देरी, जीएसटी पंजीकरण की जटिल प्रक्रिया और सचल दल द्वारा वाहनों की अनावश्यक जांच जैसे मुद्दे भी उठाए गए। आईबीए के अध्यक्ष अमित उपाध्याय ने उद्यमियों की समस्याओं से संबंधित एक ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा। अधिकारियों ने व्यापारियों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा और उन्हें समाधान के लिए उच्च स्तर पर भेजा जाएगा। कार्यक्रम में अपर आयुक्त ग्रेड-2 (अपील) राकेश वर्मा, संयुक्त आयुक्त कौशलेंद्र कुमार राय, संयुक्त आयुक्त योगेश कुमार विजय सहित विभिन्न औद्योगिक और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। अधिकारियों ने कहा कि नई ई-वे बिल प्रणाली ईमानदार व्यापारियों के लिए अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी कारोबारी माहौल तैयार करेगी।
