Noida Farmers Protest: मांगों को लेकर नोएडा प्राधिकरण के गेट पर डटे किसान, टेंट लगाकर शुरू किया धरना

Noida Farmers Protest: मांगों को लेकर नोएडा प्राधिकरण के गेट पर डटे किसान, टेंट लगाकर शुरू किया धरना
नोएडा। अपनी लंबित मांगों को लेकर गुरुवार को बड़ी संख्या में किसान नोएडा प्राधिकरण के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए। भारतीय किसान परिषद के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में किसानों ने प्रशासन और प्राधिकरण के खिलाफ जमकर नारेबाजी की तथा अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। धरने की शुरुआत सेक्टर-6 स्थित हरौला बारात घर से हुई, जहां विभिन्न गांवों के किसान एकत्र हुए। इसके बाद किसानों ने पैदल मार्च करते हुए नोएडा प्राधिकरण कार्यालय की ओर कूच किया। प्राधिकरण के मुख्य गेट के बाहर पहुंचकर किसानों ने टेंट लगाकर धरना शुरू कर दिया। दरी बिछाकर बैठे किसान लगातार अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी कर रहे हैं और प्रशासन से सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा कर रहे हैं।
किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। स्थिति पर नजर रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई और वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। आंदोलन की जानकारी मिलते ही नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी इंदु प्रकाश सिंह और अन्य अधिकारी धरनास्थल पर पहुंचे तथा किसानों से बातचीत कर आंदोलन समाप्त करने का आग्रह किया। अधिकारियों ने किसानों की समस्याओं को सुनने और समाधान के लिए संवाद का आश्वासन दिया, लेकिन किसान अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे। उनका स्पष्ट कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा और जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे धरनास्थल नहीं छोड़ेंगे।
प्रदर्शन कर रहे किसानों की प्रमुख मांगों में अधिग्रहित भूमि के बदले 10 प्रतिशत विकसित भूखंड का आवंटन शामिल है। किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के बाद उन्हें उचित लाभ मिलना चाहिए ताकि उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित रह सके। इसके अलावा किसान 5 प्रतिशत अतिरिक्त विकसित भूखंड अथवा उसके बराबर मुआवजे की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि विकास परियोजनाओं के लिए जमीन देने वाले किसानों के हितों की रक्षा करना सरकार और प्राधिकरण की जिम्मेदारी है।
किसानों ने हाई पावर कमेटी की सिफारिशों को तत्काल लागू करने की भी मांग उठाई है। उनका आरोप है कि लंबे समय से विभिन्न समितियों की सिफारिशें लंबित पड़ी हैं, जिससे किसानों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। धरने में शामिल किसानों ने गांवों की आबादी को यथावत रखने की मांग भी दोहराई। उनका कहना है कि विकास योजनाओं के नाम पर गांवों की आबादी और पारंपरिक अधिकारों को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। फिलहाल किसानों और प्रशासन के बीच बातचीत का दौर जारी है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच अभी तक कोई सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में आंदोलन के आगे और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।


