Sunworld Builder Fraud: सनवर्ल्ड सिटी परियोजना में खरीदारों से धोखाधड़ी, ईडी की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

Sunworld Builder Fraud: सनवर्ल्ड सिटी परियोजना में खरीदारों से धोखाधड़ी, ईडी की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

नोएडा और यमुना सिटी से जुड़ी सनवर्ल्ड सिटी परियोजना में बड़ा घोटाला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली हाईकोर्ट में पेश अपनी स्टेटस रिपोर्ट में साफ कहा है कि बिल्डर ने फ्लैट और भूखंड खरीदने वालों के साथ धोखाधड़ी की और करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई। इस खुलासे के बाद परियोजना से जुड़े सैकड़ों खरीदारों में हड़कंप मच गया है।

ईडी के अनुसार, यमुना सिटी के सेक्टर-22डी में स्थित सनवर्ल्ड सिटी परियोजना में अब तक कोई ठोस निर्माण कार्य नहीं किया गया, जबकि खरीदारों से वर्षों पहले पैसे लिए जा चुके हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर ईडी ने मार्च 2026 के तीसरे सप्ताह में अपनी स्थिति रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें कई गंभीर अनियमितताओं का जिक्र किया गया है।

जांच एजेंसी ने बताया कि सनवर्ल्ड सिटी प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ वर्ष 2018 से 2021 के बीच चार अलग-अलग मुकदमे दर्ज हुए थे। इन्हीं मामलों के आधार पर ईडी ने 4 नवंबर 2025 को धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) का केस दर्ज किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि बिल्डर ने साजिश और धोखाधड़ी के जरिए धन जुटाया और फिर उस राशि का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में किया गया। हालांकि ईडी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभी प्रारंभिक रिपोर्ट है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

इस मामले में खरीदारों की ओर से याचिकाकर्ता पुनीत अग्रवाल ने कहा कि जब बिल्डर को जमीन आवंटित की गई थी, उस समय दर करीब 4500 रुपये प्रति वर्गमीटर थी, जबकि अब यह दर 12 से 15 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर तक पहुंच चुकी है। ऐसे में खरीदारों को वर्तमान दरों के अनुसार लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि यमुना प्राधिकरण (YEIDA) को बिल्डर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

खरीदारों का आरोप है कि वर्ष 2011 में लगभग 102 एकड़ जमीन टाउनशिप परियोजना के लिए दी गई थी, लेकिन 15 साल बीतने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू तक नहीं हुआ। इस परियोजना में करीब 930 लोगों ने फ्लैट और प्लॉट बुक कराए थे, जिनमें से 59 खरीदार न्यायालय का दरवाजा खटखटा चुके हैं। बताया जा रहा है कि करीब पांच करोड़ रुपये अब भी फंसे हुए हैं।

हालांकि कुछ मामलों में बिल्डर द्वारा मूलधन लौटाया जा चुका है, लेकिन खरीदार अब भी ब्याज की रकम के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह मामला राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) में भी विचाराधीन है।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और खरीदारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें जांच एजेंसियों और अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

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