पहलगाम नरसंहार: भारत का निर्णायक प्रतिशोध अब अनिवार्य

पहलगाम नरसंहार: भारत का निर्णायक प्रतिशोध अब अनिवार्य
डॉ. अनिल सिंह, संपादक, स्टार व्यूज़

जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पहलगाम क्षेत्र में आतंकियों द्वारा किए गए निर्मम हमले ने 27 निर्दोष नागरिकों की जान ले ली। यह नृशंस आतंकी हमला, जो भारत के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक पर हुआ, ने न केवल पूरे देश को झकझोर दिया बल्कि रूस से अमेरिका तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीव्र निंदा को भी आमंत्रित किया। यह हमला सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद की लगातार बनी हुई चुनौती को उजागर करता है, जो भारत से एक दृढ़ और निर्णायक प्रतिक्रिया की मांग करता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब से X (पूर्व ट्विटर) पर दिए गए अपने संदेश में सख्त और दोटूक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “भारत को अपने नागरिकों के हत्यारों और उनके प्रायोजकों को अंतिम सबक सिखाने के लिए तैयार रहना होगा।” यह बयान भारत की बढ़ती नाराजगी और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस बर्बर पहलगाम हमले की पूरे भारत के राजनीतिक दलों ने सर्वसम्मति से निंदा की, जो एक दुर्लभ राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सुरक्षा चूकों की समीक्षा और भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने की रणनीति पर विचार करने के लिए उच्च स्तरीय बैठकें कीं। यह दर्शाता है कि अब भारत की आतंकवाद विरोधी नीति अधिक सक्रिय और कठोर दिशा में बढ़ रही है।

मेरी हाल ही में प्रकाशित पुस्तक “द प्राइम मिनिस्टर: डिस्कोर्सेस इन इंडियन पॉलिटी”, जिसका लोकार्पण अप्रैल 2025 की शुरुआत में प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय, नई दिल्ली में हुआ—जहां अनेक प्रतिष्ठित राजनीतिक, प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यक्तित्व मौजूद थे—में मैंने नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व में भारत की वैश्विक शक्ति के रूप में उभरती स्थिति पर विस्तार से चर्चा की है। पहलगाम हमले के बाद भारत के नेतृत्व ने जिस प्रकार दृढ़ता दिखाई है, वह इसी उदयशील शक्ति का प्रमाण है।

ऐतिहासिक रूप से, भारत की कूटनीतिक संयम नीति को कई बार इसकी कमजोरी समझा गया है। परंतु आज के बदलते वैश्विक परिदृश्य में यह धारणा बदल रही है। रूस और अमेरिका जैसे शक्तिशाली देशों द्वारा पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की स्पष्ट आलोचना, इस बात का संकेत है कि अब दुनिया भारत की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है।

भारत के गृह मंत्रालय के अनुसार, अनुच्छेद 370 हटाने के बाद 2019 से 2024 के बीच जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं में उल्लेखनीय गिरावट आई थी। फिर भी पहलगाम जैसे हमले यह स्पष्ट करते हैं कि खतरा अब भी बना हुआ है और इससे निपटने के लिए सुरक्षा एवं खुफिया व्यवस्था को और सुदृढ़ करना आवश्यक है।

रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब किसी भी प्रकार की वैश्विक आलोचना की चिंता किए बिना सख्ती से जवाब देना चाहिए। एक जिम्मेदार और संप्रभु राष्ट्र होने के नाते भारत को अपने नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाने का पूर्ण अधिकार है।

रणनीतिक स्तर पर, भारत को अपनी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाना होगा, जिसमें उन्नत खुफिया साझेदारी, सीमाओं की बेहतर निगरानी, और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली का समावेश हो। साथ ही, स्थानीय पुलिस बल को मजबूत करना, सामुदायिक भागीदारी बढ़ाना, और पारदर्शी सुरक्षा उपाय लागू करना आतंकवाद की जड़ों को कमजोर कर सकता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, भारत को अपनी कूटनीतिक मुहिम को और सशक्त बनाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे वैश्विक मंचों पर अपनी हालिया गैर-स्थायी सदस्यता का लाभ उठाकर भारत को पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को वैश्विक मंचों पर बेनकाब करना चाहिए। साथ ही, पाकिस्तान को तब तक अलग-थलग किया जाना चाहिए जब तक वह आतंक के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता।

भारत की सुरक्षा एजेंसियों की क्षमताओं को निरंतर आधुनिकरण और वैश्विक सहयोग के माध्यम से सशक्त करना आवश्यक है। मित्र देशों के साथ संयुक्त अभ्यास, खुफिया साझेदारी, और विशेष आतंकवाद निरोधी प्रशिक्षण भारत की सुरक्षा संरचना को और मजबूत बना सकते हैं।

दीर्घकालिक रणनीति के रूप में जम्मू-कश्मीर में सामाजिक और आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, शिक्षा, और सांस्कृतिक संवाद की आवश्यकता है। इस प्रकार के समावेशी प्रयास चरमपंथ के दुष्प्रचार का जवाब दे सकते हैं और स्थानीय जनमानस में विश्वास बहाल कर सकते हैं।

भारत की प्रतिक्रिया अब केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह एक समग्र नीति—जिसमें कूटनीतिक दबाव, सैन्य सख्ती और विकास का समावेश हो—के रूप में होनी चाहिए।

निष्कर्ष:
पहलगाम पर हुआ आतंकी हमला भारत की सुरक्षा और अखंडता पर एक सीधा हमला है। एक उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में भारत को अब और अधिक ठोस कदम उठाने होंगे। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए सशक्त संदेश ने भारत की प्रतिबद्धता स्पष्ट कर दी है। अब वक्त है उस प्रतिबद्धता को ठोस, कारगर कार्यवाही में बदलने का—जिससे न केवल कश्मीर घाटी बल्कि समूचे भारत को स्थायी सुरक्षा, शांति और विकास की दिशा में अग्रसर किया जा सके।

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