Bullet Train: भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का निर्माण तेज, अश्विनी वैष्णव ने बेंगलुरु में लिया जायजा
रिपोर्ट: अभिषेक ब्याहुत
भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन अब आकार लेने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार, 1 नवंबर को बेंगलुरु स्थित BEML के ADITYA मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का दौरा किया। यहां उन्होंने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना के लिए तैयार की जा रही बुलेट ट्रेन के निर्माण कार्य और तकनीकी प्रक्रियाओं की समीक्षा की। इस दौरान रेल मंत्री ने ट्रेन के अलग-अलग हिस्सों के निर्माण, असेंबली और गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया का जायजा लिया। इस स्वदेशी ट्रेन को आधुनिक तकनीक और निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
दौरे के दौरान अश्विनी वैष्णव ने अंडरफ्रेम, साइडवॉल और रूफ असेंबली, कोच असेंबली के साथ सतह की तैयारी और उपचार से जुड़ी प्रक्रियाओं को देखा। उन्होंने साइड मॉड्यूल और रूफ मॉड्यूल के निर्माण तथा उनके एकीकरण की प्रक्रिया की भी समीक्षा की। इसके अलावा यात्री सीटों, एयर कंडीशनिंग सिस्टम, कपलर और ट्रेन में इस्तेमाल होने वाले अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों के निर्माण और गुणवत्ता संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

रेल मंत्री ने कहा कि हाई-स्पीड परिचालन के लिए ट्रेन के प्रत्येक घटक की गुणवत्ता और सटीकता बेहद महत्वपूर्ण है। निर्माण और परीक्षण की सभी प्रक्रियाएं यह सुनिश्चित करने के लिए की जा रही हैं कि ट्रेन तेज गति से संचालन के दौरान हाई-स्पीड रेल यात्रा के लिए निर्धारित कड़े मानकों पर खरी उतरे। उन्होंने बताया कि ट्रेन के निर्माण में तकनीकी बारीकियों और गुणवत्ता नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बुलेट ट्रेन के निर्माण और परीक्षण की महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में ‘स्क्वीज टेस्ट’ भी शामिल है। इस परीक्षण के दौरान कोच की बॉडी पर नियंत्रित दबाव और खिंचाव डाला जाता है। इसके जरिए कोच की मजबूती, कठोरता और निर्धारित आकार को बनाए रखने की क्षमता की जांच की जाती है। तेज रफ्तार से चलने वाली ट्रेन के सुरक्षित परिचालन के लिए यह परीक्षण काफी अहम माना जाता है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि ट्रेन का ढांचा हाई-स्पीड संचालन के दौरान पड़ने वाले दबाव को सहन कर सके।
आठ कोच वाली इस स्वदेशी बुलेट ट्रेन में चार मोटर कोच और चार ट्रेलर कोच होंगे। इसे अधिकतम 280 किलोमीटर प्रति घंटे की परीक्षण गति और 249 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति के लिए डिजाइन किया जा रहा है। ट्रेन की कुल लंबाई करीब 202 मीटर होगी और इसमें एक साथ लगभग 557 यात्री सफर कर सकेंगे। दिव्यांग यात्रियों के लिए भी ट्रेन में विशेष स्थान निर्धारित किए गए हैं।

यात्रियों के आरामदायक सफर को ध्यान में रखते हुए ट्रेन में कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसमें आरामदायक सीटें, पर्याप्त लेगरूम, एलईडी लाइटिंग, सामान रखने की जगह और पावर आउटलेट दिए जाएंगे। इसके अलावा बायो-डाइजेस्टर शौचालय और बड़ी खिड़कियां भी होंगी। यात्रियों को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए अंग्रेजी, हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में सूचना देने वाली डिस्प्ले और उद्घोषणा प्रणाली लगाई जाएगी। ट्रेन में इमरजेंसी टॉक-बैक और वाई-फाई आधारित मनोरंजन सुविधा भी उपलब्ध कराने की योजना है।
दिव्यांग यात्रियों की सुविधा के लिए ट्रेन का डिजाइन विशेष जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसमें प्लेटफॉर्म के अनुरूप प्रवेश व्यवस्था, रिट्रैक्टेबल फुटस्टेप, व्हीलचेयर के अनुकूल दरवाजे, विशेष सीटें और दिव्यांगजनों के लिए निर्धारित शौचालय होंगे। इसके साथ ही ब्रेल संकेतक भी लगाए जाएंगे, ताकि दृष्टिबाधित यात्रियों को आवश्यक जानकारी हासिल करने में आसानी हो। ट्रेन में आधुनिक एयर कंडीशनिंग सिस्टम, ध्वनि अवरोधक व्यवस्था और शोर कम करने वाली तकनीक का इस्तेमाल भी किया जाएगा, जिससे तेज रफ्तार के बावजूद यात्रियों को अधिक आरामदायक वातावरण मिल सके।
यह बुलेट ट्रेन 25 केवी एसी ट्रैक्शन प्रणाली और रीजनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक से लैस होगी। रीजनरेटिव ब्रेकिंग के जरिए ब्रेक लगाने के दौरान उत्पन्न होने वाली ऊर्जा को दोबारा उपयोग में लाने की व्यवस्था होगी। जरूरत के अनुसार दो आठ-कोच वाली ट्रेनसेट को आपस में जोड़कर 16 कोच की ट्रेन के रूप में भी संचालित किया जा सकेगा। इससे यात्रियों की मांग और परिचालन जरूरतों के अनुसार ट्रेन की क्षमता बढ़ाने का विकल्प मिलेगा।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना के लिए तैयार की जा रही यह ट्रेन भारत की स्वदेशी रेल निर्माण क्षमता और हाई-स्पीड रेल तकनीक के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। BEML के बेंगलुरु स्थित प्लांट में निर्माण और परीक्षण प्रक्रियाओं की समीक्षा के साथ इस परियोजना का काम आगे बढ़ रहा है। इसके पूरा होने पर देश को हाई-स्पीड रेल परिवहन के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक से लैस स्वदेशी ट्रेनसेट मिलने की उम्मीद है।





