Parkinson Disease Awareness: AIIMS ने बताया, 22-49 उम्र के युवाओं में भी बढ़ रहा पार्किंसन रोग

Parkinson Disease Awareness: AIIMS ने बताया, 22-49 उम्र के युवाओं में भी बढ़ रहा पार्किंसन रोग
नई दिल्ली: विश्व पार्किंसन दिवस (10 अप्रैल) से पहले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS Delhi) ने चेतावनी दी है कि पार्किंसन रोग अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि 22 से 49 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार पार्किंसन रोग एक न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसमें मस्तिष्क में डोपामिन बनाने वाले न्यूरॉन्स धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं। इसके कारण शरीर में कंपन, चलने में कठिनाई, मांसपेशियों में अकड़न और संतुलन बिगड़ने जैसी समस्याएं होती हैं। साथ ही कई मरीजों में अवसाद, नींद की कमी और याददाश्त से जुड़ी दिक्कतें भी देखी जाती हैं।
AIIMS के न्यूरोसाइंसेज केंद्र के प्रमुख डॉ. शैलेश बी. गायकवाड़ ने बताया कि भारत में दुनिया के कुल पार्किंसन मरीजों का लगभग 10-15% हिस्सा मौजूद है। देश में हर साल करीब 1.5 से 2 लाख नए मामले सामने आ रहे हैं और अनुमान है कि 2050 तक मरीजों की संख्या 25-30 लाख तक पहुंच सकती है।
डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी के बढ़ने के पीछे बढ़ती उम्र, प्रदूषण, कीटनाशकों का असर, अनुवांशिक कारण और खराब जीवनशैली प्रमुख वजहें हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूरोलॉजिस्ट की कमी और देर से पहचान भी स्थिति को गंभीर बना रही है।
इलाज को लेकर विशेषज्ञों ने बताया कि लेवोडोपा जैसी दवाएं मुख्य उपचार हैं। इसके अलावा फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और नियमित व्यायाम से मरीजों की स्थिति में सुधार किया जा सकता है। गंभीर मामलों में डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (DBS) सर्जरी भी प्रभावी मानी जाती है।
AIIMS ने यह भी जानकारी दी कि अब एमआर-गाइडेड हाई इंटेंसिटी फोकस्ड अल्ट्रासाउंड (MR-Guided HIFU) जैसी नई तकनीक पर काम चल रहा है, जिससे बिना बड़ी सर्जरी के किफायती इलाज संभव हो सकेगा।
डॉक्टरों ने अपील की है कि हाथ कांपना, धीमी चाल या संतुलन बिगड़ने जैसे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें, ताकि समय पर बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।
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