Noida fake call center: नोएडा में 500 से ज्यादा लोगों से ठगी करने वाला फर्जी कॉल सेंटर पकड़ा, 1.20 करोड़ रुपये फ्रीज

Noida fake call center: नोएडा में 500 से ज्यादा लोगों से ठगी करने वाला फर्जी कॉल सेंटर पकड़ा, 1.20 करोड़ रुपये फ्रीज
नोएडा। नोएडा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लैप्स बीमा पॉलिसी को मैच्योर कराने के नाम पर ठगी करने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। यह कॉल सेंटर सेक्टर-10 में संचालित किया जा रहा था, जहां से देशभर के लोगों को झांसा देकर उनसे लाखों रुपये ऐंठे जा रहे थे। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके 20 बैंक खातों में जमा करीब 1.20 करोड़ रुपये फ्रीज किए गए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह अब तक 500 से अधिक लोगों को अपना शिकार बना चुका है।
एडीसीपी शैव्या गोयल ने बताया कि सूचना मिलने के बाद सेक्टर-10 स्थित डी-226 टॉप फ्लोर पर छापा मारा गया। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो आरोपी कॉल सेंटर के जरिए लोगों से ऑनलाइन बातचीत करते हुए ठगी को अंजाम दे रहे थे। छापेमारी के दौरान पुलिस ने लैपटॉप, मोबाइल फोन और बड़ी मात्रा में डिजिटल डेटा बरामद किया। जांच में कई बैंक खातों की जानकारी भी सामने आई, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर करने में किया जा रहा था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान वरुण शर्मा निवासी सुपरटेक इकोविलेज-1, मदन गुप्ता निवासी ला रेजीडेंसी टेक जोन-4 और प्रदीप वर्मा निवासी भंगेल, थाना फेस-2 के रूप में हुई है। तीनों आरोपी नोएडा के रहने वाले हैं और पिछले करीब छह महीने से इस फर्जी कॉल सेंटर को चला रहे थे।
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी जस्ट डायल से डेटा खरीदते थे। करीब 10 हजार रुपये में उन्हें 5 हजार लोगों का डेटा मिल जाता था। इसके अलावा ये लोग डार्क वेब से भी लोगों की निजी जानकारी हासिल करते थे। मौके से 15 कॉलिंग शीट बरामद की गई हैं, जिनमें लोगों के नाम, फोन नंबर और अन्य जानकारियां दर्ज थीं।
ठगी के तरीके को लेकर पुलिस ने बताया कि आरोपी उन लोगों को कॉल करते थे जिनकी बीमा पॉलिसी लैप्स हो चुकी होती थी या जो जल्द पॉलिसी मैच्योर कराना चाहते थे। खुद को बीमा कंपनी का प्रतिनिधि बताकर ये लोग प्रोसेसिंग फीस या सेटलमेंट चार्ज के नाम पर 10,500 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लेते थे। जैसे ही पैसा खाते में आता, आरोपी अपना मोबाइल नंबर बंद कर देते थे। अधिकांश कॉल इंटरनेट कॉलिंग के जरिए की जाती थीं, जिससे उनकी पहचान छिपी रहे।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा और बैटिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर पैसे को इधर-उधर करते थे। ठगी की रकम पहले बैटिंग ऐप के जरिए मंगवाई जाती थी, जिसमें करीब 20 प्रतिशत हिस्सा ऐप संचालकों को दिया जाता था और बाकी 80 प्रतिशत रकम आरोपियों के बैंक खातों में जमा हो जाती थी। इसके बाद आरोपी कैश निकालकर आपस में बांट लेते थे।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के बैंक खातों को लेकर एनसीआरपी पोर्टल पर अब तक करीब 20 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं, जो अलग-अलग राज्यों से सामने आई हैं। छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक लैपटॉप, आठ स्मार्ट मोबाइल फोन और आठ कीपैड मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी जारी है।





