Noida Cyber Crime Case: नोएडा में सॉफ्टवेयर डेवलपर पर 12 लाख रुपये हड़पने और कंपनी डेटा कब्जाने का आरोप, साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज

Noida Cyber Crime Case: नोएडा में सॉफ्टवेयर डेवलपर पर 12 लाख रुपये हड़पने और कंपनी डेटा कब्जाने का आरोप, साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज
नोएडा। शहर की एक निजी कंपनी ने अपने ही सॉफ्टवेयर डेवलपर पर भरोसे का गलत फायदा उठाकर 12 लाख रुपये से अधिक की रकम हड़पने और कंपनी का संवेदनशील डिजिटल डेटा अपने कब्जे में लेने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले में नोएडा के साइबर क्राइम थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस ने बैंक लेनदेन और तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता ललित अग्रवाल के अनुसार उनकी कंपनी ने वर्ष 2017 में रवि राज को सर्वर, ईआरपी सिस्टम, वेबसाइट और अन्य डिजिटल संचालन की देखरेख के लिए नियुक्त किया था। कार्य की प्रकृति को देखते हुए उसे कंपनी के सर्वर, बैकएंड डेटा, सोर्स कोड और वेबसाइट कंट्रोल पैनल तक पूर्ण एडमिन एक्सेस दिया गया था। आधिकारिक कार्यों के लिए कंपनी की ओर से एक लैपटॉप भी उपलब्ध कराया गया था।
आरोप है कि जुलाई 2025 के पहले सप्ताह में कंपनी को पता चला कि रवि राज ने बिना अनुमति सर्वर और डेटा तक पहुंच बनाकर उस पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। इसके बाद कंपनी का अपना एडमिन एक्सेस बाधित हो गया, जिससे नियमित कामकाज प्रभावित होने लगा।
कंपनी प्रबंधन का कहना है कि जब उससे पासवर्ड, सोर्स कोड और सिस्टम कंट्रोल वापस करने को कहा गया तो उसने इंकार कर दिया और बदले में धनराशि की मांग करने लगा। कंपनी के अनुसार कामकाज ठप होने की स्थिति में उन्हें उसकी मांग पूरी करनी पड़ी। आरोप है कि इसके बाद भी आरोपी सिस्टम ठीक करने और डेटा बहाल करने के नाम पर अलग-अलग माध्यमों से पैसे लेता रहा।
शिकायत में बताया गया है कि आरोपी को नगद, चेक और यूपीआई के जरिए कुल 12,21,628 रुपये का भुगतान किया गया। इसके बावजूद कंपनी का सिस्टम पूरी तरह से बहाल नहीं किया गया। साथ ही, कंपनी का लैपटॉप भी बार-बार मांगने के बावजूद वापस नहीं किया गया।
कंपनी ने पुलिस से मांग की है कि आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, कंपनी का सर्वर, ईआरपी सिस्टम और सोर्स कोड सुरक्षित कर वापस दिलाया जाए तथा हड़पी गई रकम की रिकवरी कराई जाए।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में बैंक ट्रांजैक्शन, डिजिटल लॉग, सर्वर एक्सेस रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला कॉरपोरेट सेक्टर में डेटा सुरक्षा और डिजिटल एक्सेस कंट्रोल की अहमियत को एक बार फिर उजागर करता है, जहां आंतरिक स्तर पर की गई लापरवाही गंभीर वित्तीय और परिचालन संकट में बदल सकती है।
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