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New Delhi : सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत 1400 श्रद्धालुओं की विशेष ट्रेन रवाना

New Delhi : केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व – सोमनाथ यात्रा’ के तहत गुरुवार को सफदरजंग रेलवे स्टेशन से लगभग 1400 श्रद्धालुओं को लेकर जाने वाली विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस पहल के साथ दिल्ली देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने एक साथ इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को सोमनाथ यात्रा पर भेजा है।

इस अवसर पर कहा गया कि यह यात्रा हजारों वर्षों पुरानी आस्था, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। यात्रा का उद्देश्य लोगों को भारत की आध्यात्मिक विरासत से जोड़ना और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करना है।

यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को सोमनाथ मंदिर सहित अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए जाएंगे। इस पहल में दिल्ली सरकार द्वारा रेल किराया और भोजन की व्यवस्था की गई है, जबकि गुजरात सरकार ठहरने, स्थानीय परिवहन और दर्शन की सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। दोनों राज्यों के समन्वय से यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने की तैयारी की गई है।

इस मौके पर गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह यात्रा देश की सांस्कृतिक विरासत और एकता को सशक्त करने का माध्यम है, जो सोमनाथ मंदिर की गौरवगाथा से प्रेरित है। वहीं रेखा गुप्ता ने इसे केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं के उत्सव के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि सरकार नागरिकों की आस्था और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि यह पहल नागरिकों की आस्था, सम्मान और सांस्कृतिक जुड़ाव को सशक्त करने का संकल्प है।

यह विशेष ट्रेन सफदरजंग रेलवे स्टेशन से गुजरात के वेरावल तक जाएगी, जहां से श्रद्धालु सोमनाथ मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन करेंगे। सभी यात्री 5 मई 2026 को दिल्ली लौटेंगे। यात्रा के लिए 19 एसी 3-टियर कोच लगाए गए हैं और प्रत्येक कोच में यात्रियों की सहायता के लिए टीम लीडर तैनात किए गए हैं। ट्रेन में डॉक्टरों की टीम, हाउसकीपिंग स्टाफ और रेलवे सुरक्षा बल की मौजूदगी से यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित की गई है।

फ्लैग-ऑफ समारोह के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया, जिसमें राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और पंजाब की लोक कलाओं और पारंपरिक नृत्यों ने माहौल को भक्ति और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया।

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