Noida Child PGI Suicide: लैब तकनीशियन ट्रेनी ने फांसी लगाकर दी जान, सुसाइड नोट में झलका दर्द
Noida के सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई परिसर में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां लैब तकनीशियन प्रशिक्षु ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना सोमवार देर रात की बताई जा रही है, जिससे पूरे परिसर में हड़कंप मच गया और स्टाफ के बीच शोक का माहौल बन गया।
मृतक की पहचान अवधेश कुमार के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के Shravasti जिले के भिनगा गांव का रहने वाला था। वह चाइल्ड पीजीआई में लैब तकनीशियन ट्रेनी के रूप में कार्यरत था और अस्पताल परिसर में ही रह रहा था। जानकारी के अनुसार सोमवार रात करीब 11 बजे वह अपने कमरे में फंदे से लटका हुआ मिला। जब काफी देर तक वह बाहर नहीं आया तो स्टाफ को शक हुआ, जिसके बाद कमरे में जाकर देखा गया और घटना की जानकारी तुरंत पुलिस को दी गई।
सूचना मिलते ही Noida Police मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। साथ ही फोरेंसिक टीम को बुलाकर घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए हैं, ताकि मामले की गहराई से जांच की जा सके। पुलिस के अनुसार मृतक के परिजन उसे करीब तीन दिन पहले ही यहां छोड़कर गए थे और शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान चल रहा था।
घटना स्थल से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें युवक ने अपनी पीड़ा जाहिर की है। नोट में लिखा गया है कि वह किसी को परेशान नहीं करना चाहता और खुद को सब पर बोझ महसूस कर रहा था। उसने यह भी लिखा कि वह जीवन में कुछ खास नहीं कर पाया और आर्थिक रूप से सक्षम बनने का उसका सपना अधूरा रह गया। इन पंक्तियों से साफ झलकता है कि वह गहरे मानसिक तनाव और निराशा से गुजर रहा था।
फिलहाल पुलिस सुसाइड नोट की जांच कर रही है और यह जानने की कोशिश कर रही है कि आत्महत्या के पीछे असली कारण क्या था। साथ ही मृतक के परिवार वालों से भी पूछताछ की जाएगी, ताकि पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट किया जा सके।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि युवाओं के बीच बढ़ता मानसिक दबाव और तनाव किस हद तक गंभीर हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में समय रहते भावनात्मक और मानसिक सहयोग मिलना बेहद जरूरी होता है, ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
