Jaypee Greens Fraud Case: भूखंड विवाद में कंपनी और 10 लोगों पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज

Jaypee Greens Fraud Case: भूखंड विवाद में कंपनी और 10 लोगों पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज
ग्रेटर नोएडा में भूखंड आवंटन से जुड़े विवाद ने तूल पकड़ लिया है। सेक्टर बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर जेपी ग्रींस प्राइवेट लिमिटेड और 10 अन्य नामजद लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, धमकी और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने कहा है कि पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पीड़ित सत्येंद्र नारायण द्विवेदी, जो नोएडा फेज-2 के निवासी हैं, ने आरोप लगाया है कि उन्होंने वर्ष 2020 में ग्रेटर नोएडा स्थित स्पोर्ट्स विला परियोजना में 1470 वर्गमीटर का एक भूखंड खरीदा था। कंपनी ने विधिवत आवंटन पत्र जारी कर बैनामा भी करा दिया था। उस समय कंपनी के कर्मचारियों ने आश्वासन दिया था कि पूर्व निर्धारित बिल्डिंग प्लान के अनुसार निर्माण कार्य कराया जा सकता है।
हालांकि जब पीड़ित ने निर्माण की तैयारी शुरू की तो उन्हें पता चला कि जो भवन निर्माण प्लान उन्हें दिया गया था, वह प्राधिकरण की स्वीकृत योजना से मेल नहीं खाता। इसके बाद उन्होंने स्वीकृत नक्शे के अनुसार निर्माण की अनुमति के लिए प्राधिकरण में आवेदन किया। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें लगभग 46 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े।
प्राधिकरण से मंजूरी मिलने के बाद जब वह बेसमेंट की खुदाई कराने पहुंचे तो उन्हें जानकारी मिली कि उनके भूखंड के आसपास की जमीन पर कथित रूप से सुनील शर्मा और मंजू शर्मा ने कब्जा कर रखा है। दोनों को जेपी ग्रींस ग्रुप से जुड़ा अधिकारी बताया जा रहा है। पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने कंपनी की हेल्प डेस्क पर शिकायत दर्ज करानी चाही तो उन्हें धमकी देकर भगा दिया गया। इतना ही नहीं, निर्माण कार्य में लगे मिस्त्रियों और मजदूरों के साथ मारपीट कर उन्हें भी मौके से भगा दिया गया।
लगातार परेशान होने के बाद पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली, जिसके आदेश पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। नामजद आरोपियों में मैसर्स जय प्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड, सुनील शर्मा, मंजू शर्मा, दलजीत सिंह, संजीव शेखर, मुकेश चोपड़ा, केसी बत्रा, अश्वनी सिंह, शैलेंद्र नेगी, सीबी सिंह और विकास चौधरी शामिल हैं।
कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार ने बताया कि सभी आरोपों की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने ग्रेटर नोएडा के रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और खरीदारों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।




