DSCI में करोड़ों की साइक्लोट्रॉन और PET-CT मशीनें बंद, कैंसर मरीजों की बढ़ी मुश्किलें

DSCI में करोड़ों की साइक्लोट्रॉन और PET-CT मशीनें बंद, कैंसर मरीजों की बढ़ी मुश्किलें

नई दिल्ली, 31 जुलाई : दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (DSCI) में करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित साइक्लोट्रॉन और पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी यानी PET-CT जैसी अत्याधुनिक मशीनों का संचालन फिलहाल बंद है। संस्थान में प्रशिक्षित डॉक्टर और तकनीकी स्टाफ उपलब्ध होने के बावजूद इन सुविधाओं का नियमित संचालन शुरू नहीं हो सका है। इसका सीधा असर कैंसर मरीजों की जांच और इलाज की प्रक्रिया पर पड़ रहा है।

मरीजों को समय पर अत्याधुनिक जांच की सुविधा नहीं मिलने के कारण कई लोगों को निजी जांच केंद्रों या अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। इससे मरीजों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने के साथ-साथ उपचार शुरू होने में भी देरी की स्थिति पैदा हो सकती है।

साइक्लोट्रॉन PET-CT जांच के लिए जरूरी रेडियोफार्मास्यूटिकल, जैसे FDG, तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। PET-CT जांच की मदद से कैंसर की शुरुआती स्थिति का पता लगाने, बीमारी के फैलाव की स्टेजिंग करने, उपचार के असर का आकलन करने और बीमारी के दोबारा लौटने की संभावना का मूल्यांकन करने में चिकित्सकों को मदद मिलती है।

अस्पताल में साइक्लोट्रॉन उपलब्ध नहीं होने पर रेडियोट्रेसर बाहर से मंगाने की जरूरत पड़ सकती है। इससे रेडियोफार्मास्यूटिकल की उपलब्धता, जांच की लागत और समय पर जांच कराने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

वहीं PET-CT स्कैन शरीर की संरचना और कैंसर कोशिकाओं की गतिविधि की जानकारी एक साथ उपलब्ध कराता है। इससे डॉक्टरों को बीमारी की स्थिति समझने और उपचार की बेहतर योजना तैयार करने में मदद मिलती है। कई कैंसर मामलों में PET-CT जांच उपचार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर के मामलों में समय पर जांच और उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि अस्पताल में अत्याधुनिक मशीनें मौजूद हों और उनके संचालन के लिए आवश्यक तकनीकी संसाधन भी उपलब्ध हों, लेकिन सेवाएं शुरू न हो पाएं, तो इसका सबसे अधिक असर मरीजों पर पड़ता है।

अब अस्पताल प्रबंधन की ओर से मशीनों को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। DSCI की प्रवक्ता एवं क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. प्रज्ञा शुक्ला के अनुसार संस्थान में न्यूक्लियर मेडिसिन सुविधा से संबंधित फैकल्टी उपलब्ध नहीं होने के कारण मशीनों का संचालन कुछ समय से बंद था।

उन्होंने बताया कि फैकल्टी के पदों को भरने के लिए कई बार विज्ञापन जारी किए गए, लेकिन कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद मुख्यमंत्री के सहयोग से सफदरजंग अस्पताल से एक फैकल्टी को संस्थान में नियुक्त किया गया है।

डॉ. शुक्ला के अनुसार फिलहाल मशीन को दोबारा शुरू करने यानी रिकमीशनिंग की प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी होगी और DSCI में मरीजों को फिर से न्यूक्लियर मेडिसिन से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

 

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