Extreme Weather Fuel: सेना को मिला माइनस 42°C वाला स्वदेशी डीजल, बर्फीले इलाकों में बढ़ेगी सैन्य ताकत

Extreme Weather Fuel: सेना को मिला माइनस 42°C वाला स्वदेशी डीजल, बर्फीले इलाकों में बढ़ेगी सैन्य ताकत
नई दिल्ली, 31 जुलाई : अत्यधिक ठंड वाले क्षेत्रों में भारतीय सेना के अभियानों को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने शुक्रवार को स्वदेशी एक्सट्रीम वेदर ग्रेड यानी XWG डीजल लॉन्च किया, जो माइनस 42 डिग्री सेल्सियस तक के अत्यधिक ठंडे तापमान में भी प्रभावी रहने के लिए विकसित किया गया है।
भारतीय सेना और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने मिलकर इस विशेष ईंधन को विकसित किया है। इसका इस्तेमाल लद्दाख, सियाचिन और देश के अन्य अत्यधिक ठंडे एवं ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात सैन्य वाहनों में किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य लड़ाकू और लॉजिस्टिक वाहनों की गतिशीलता, सुरक्षा और परिचालन क्षमता को बेहतर बनाए रखना है।
अत्यधिक ठंड में सामान्य डीजल के गाढ़ा होने की समस्या सामने आती है। इससे फ्यूल फिल्टर जाम होने और वाहन के संचालन में परेशानी पैदा होने की आशंका रहती है। सेना के लिए यह चुनौती विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऊंचाई वाले बर्फीले क्षेत्रों में वाहनों की लगातार उपलब्धता और आवाजाही सैन्य अभियानों के लिए बेहद जरूरी होती है।
नया XWG डीजल अत्यधिक कम तापमान में भी इस समस्या को कम करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह ईंधन BS-4 मानकों के अनुरूप है और सेना के मौजूदा वाहनों में बिना किसी इंजन बदलाव के इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे नए ईंधन के लिए अलग तरह के वाहनों या इंजन प्रणाली की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सेना प्रमुख ने स्वदेशी XWG डीजल को ‘गेम चेंजर’ बताते हुए कहा कि इससे कड़ाके की ठंड में वाहनों को चालू रखने के लिए अपनाए जाने वाले अस्थायी उपायों की आवश्यकता कम होगी। अत्यधिक ठंड में वाहनों की परिचालन क्षमता बनाए रखने के लिहाज से यह तकनीकी उपलब्धि महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस ईंधन का लाभ केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। अत्यधिक ऊंचाई और कम तापमान वाले इलाकों में रहने वाले नागरिकों के परिवहन साधनों के लिए भी इस तरह की तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। इससे कठिन मौसम वाले क्षेत्रों में परिवहन को अधिक भरोसेमंद बनाए जाने की उम्मीद है।



