Farmer Protest Detention: यमुना प्राधिकरण आंदोलन में जेल भेजे गए किसानों की बिना शर्त रिहाई की मांग, पुलिस कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन

Farmer Protest Detention: यमुना प्राधिकरण आंदोलन में जेल भेजे गए किसानों की बिना शर्त रिहाई की मांग, पुलिस कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन

ग्रेटर नोएडा में किसानों की लंबित मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा ने शासन और पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मोर्चा के पदाधिकारियों ने यमुना विकास प्राधिकरण पर चल रहे आंदोलन के दौरान गिरफ्तार कर जेल भेजे गए किसानों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग को लेकर गुरुवार को गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नर के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन मोर्चा की ओर से कासना थाना प्रभारी को सौंपा गया, जिसमें प्रशासन को चेतावनी दी गई है कि यदि किसानों पर दर्ज किए गए मुकदमे वापस नहीं लिए गए और उन्हें शीघ्र रिहा नहीं किया गया, तो पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आंदोलन को व्यापक स्तर पर तेज किया जाएगा।

गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे राष्ट्रीय महासचिव आलोक नागर और राष्ट्रीय प्रवक्ता बृजेश भाटी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान कार्यकर्ता सेक्टर ओमीक्रोन-1ए स्थित आवास पर एकत्रित हुए थे। किसानों के एकजुट होने की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया और उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद अधिकारियों के माध्यम से पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन प्रेषित किया गया। किसान नेताओं ने कहा कि किसान 10 प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड, 64 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा और नए भूमि अधिग्रहण कानून को लागू कराने जैसी पूरी तरह जायज और विधिक मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे थे, लेकिन पुलिस-प्रशासन ने उनकी आवाज दबाने के लिए लोकतंत्र विरोधी रवैया अपनाते हुए लाठीचार्ज किया और दर्जनों किसानों को जेल में डाल दिया।

मोर्चा के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि जेल में बंद किसानों की रिहाई तक आंदोलन विराम नहीं लेगा। इस अवसर पर आरडब्ल्यूए अध्यक्ष योगेंद्र मावी, मनीष नागर, उमेश ठाकुर, जगत बीडीसी, सीपी सोलंकी, अंकुर नागर, हंसराज मावी, इलम सिंह, अरविंद सिंह, आकाश भाटी और अमित नागर समेत दर्जनों किसान उपस्थित रहे। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि प्राधिकरण के अधिकारी किसानों की समस्याओं का बातचीत से समाधान निकालने के बजाय पुलिसिया बल का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से अपील की है कि वे हठधर्मिता छोड़कर किसानों के साथ उच्चस्तरीय वार्ता करें और गिरफ्तार सभी अन्नदाताओं को तुरंत रिहा कर शांति व्यवस्था बहाल करने में सहयोग दें।

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