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Nasha Mukt Bharat: बुलाकी दास अस्पताल में बंदरों का आतंक, मरीजों और स्टाफ में दहशत

Nasha Mukt Bharat: बुलाकी दास अस्पताल में बंदरों का आतंक, मरीजों और स्टाफ में दहशत

नई दिल्ली, 29 जुलाई। पूर्वी दिल्ली के शाहदरा स्थित बुलाकी दास आयुष्मान आरोग्य मंदिर, जिसे पहले बुलाकी दास टीबी अस्पताल के नाम से जाना जाता था, में बंदरों की बढ़ती मौजूदगी से मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल कर्मचारियों में चिंता का माहौल है। अस्पताल परिसर में लगातार बंदरों के आने की शिकायतों के बीच मरीजों और कर्मचारियों ने नगर निगम से स्थायी समाधान की मांग की है।

सूत्रों के अनुसार, पिछले 10 दिनों में बंदरों के काटने की 10 घटनाएं सामने आई हैं। बुधवार को ही दो महिलाओं और एक पुरुष समेत तीन लोगों को बंदरों ने काट लिया। घटना के बाद अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों में डर का माहौल देखा गया।

प्रत्यक्षदर्शियों और कर्मचारियों का कहना है कि अस्पताल परिसर में बंदरों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने वाले लोगों को बीमारी के साथ-साथ बंदरों के हमले का भी डर बना रहता है। अस्पताल परिसर में बंदरों की मौजूदगी के कारण मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बिंदु बेहल ने माना कि क्षेत्र में बंदरों की समस्या गंभीर है। उन्होंने बताया कि शाहदरा क्षेत्र में हरित क्षेत्र अधिक होने के कारण बंदरों की आवाजाही बनी रहती है। इस संबंध में नगर निगम (एमसीडी) के पशु नियंत्रण विभाग को शिकायतें भेजी गई हैं और कार्रवाई भी हुई है।

हालांकि, डॉ. बेहल ने पिछले 10 दिनों में 10 लोगों को बंदरों द्वारा काटे जाने के दावे की पुष्टि नहीं की। उन्होंने कहा कि उन्हें 29 जुलाई की एक घटना की जानकारी है, लेकिन 10 मामलों की आधिकारिक जानकारी उनके पास उपलब्ध नहीं है।

अस्पताल प्रशासन के स्तर से नगर निगम को समस्या की जानकारी दिए जाने के बावजूद मरीजों और कर्मचारियों का कहना है कि बंदरों की समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है। उनका कहना है कि अस्पताल ऐसा स्थान है जहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन आते हैं, इसलिए परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

अस्पताल परिसर में बंदरों की बढ़ती मौजूदगी को देखते हुए मरीजों और कर्मचारियों ने एमसीडी से प्रभावी और दीर्घकालिक कार्रवाई की मांग की है, ताकि अस्पताल आने वाले लोगों को बंदरों के हमले के डर से राहत मिल सके और परिसर को सुरक्षित बनाया जा सके।

 

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