Cyber Fraud: ऑनलाइन टास्क और फ्रेंचाइजी के नाम पर तीन लोगों से 16.79 लाख की ठगी, साइबर थाने में केस दर्ज
नोएडा। साइबर ठगों ने अलग-अलग तरीके अपनाकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा के तीन लोगों को अपना शिकार बनाया है। बैंक खाते से अनधिकृत लेनदेन, ऑनलाइन टास्क के जरिए कमाई और नामी कंपनी की फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देकर आरोपियों ने तीन लोगों से कुल करीब 16.79 लाख रुपये ठग लिए। शिकायतों के आधार पर साइबर क्राइम थाने में तीनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पहला मामला सलारपुर निवासी पवित्र कुमार मिश्रा से जुड़ा है। उन्होंने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनका मोबाइल नंबर इंडसइंड बैंक के खाते से जुड़ा हुआ था। आरोप है कि साइबर ठगों ने उनके व्हाट्सऐप और बैंक खाते से छेड़छाड़ कर 17 सितंबर 2025 को पांच अलग-अलग लेनदेन किए।
इन पांच लेनदेन के जरिए आरोपियों ने उनके खाते से कुल 6.24 लाख रुपये निकाल लिए। ठगी का पता चलने के बाद पवित्र कुमार मिश्रा ने 19 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। मामले में अब साइबर क्राइम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट निवासी अर्चना कुमारी को साइबर ठगों ने ऑनलाइन टास्क पूरा करके कमाई करने का लालच दिया। शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने 19 जून 2025 को व्हाट्सऐप के माध्यम से उनसे संपर्क किया। शुरुआत में उन्हें छोटे-छोटे ऑनलाइन टास्क दिए गए और इन्हें पूरा करने पर कुछ रकम वापस भी की गई।
शुरुआत में पैसे मिलने के कारण अर्चना को आरोपियों पर भरोसा हो गया। इसके बाद ठगों ने उन्हें अधिक कमाई का लालच देकर अलग-अलग टास्क में रुपये लगाने के लिए कहा। आरोपियों ने टास्क पूरा करने, कथित तकनीकी समस्या दूर करने और जमा रकम व कमाई निकालने के नाम पर लगातार भुगतान कराया।
अर्चना ने 19 जून से 11 जुलाई 2025 के बीच अलग-अलग बैंक खातों और यूपीआई आईडी में कई लेनदेन किए। इस दौरान उन्होंने कुल करीब 5.05 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद न तो उनकी जमा रकम वापस मिली और न ही ऑनलाइन टास्क से हुई कथित कमाई का भुगतान किया गया। ठगी का अहसास होने पर उन्होंने मामले की शिकायत की।
तीसरा मामला सेक्टर-78 निवासी पंकज कुमार से जुड़ा है। साइबर ठगों ने उन्हें टाटा ट्रेंट लिमिटेड की फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देकर करीब 5.49 लाख रुपये की ठगी की।
शिकायत के मुताबिक वर्ष 2025 में पंकज कुमार की मनीष जैन और राकेश वर्मा नाम बताने वाले व्यक्तियों से ईमेल और फोन के माध्यम से बातचीत हुई थी। दोनों ने खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए उन्हें फ्रेंचाइजी उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।
आरोपियों ने फ्रेंचाइजी प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर पंजीकरण शुल्क और सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा कराने के लिए कहा। पंकज कुमार ने 27 जून 2025 को पहले 49,500 रुपये ट्रांसफर किए। इसके बाद उन्होंने पांच लाख रुपये और अलग-अलग खातों में भेज दिए।
आरोप है कि भरोसा कायम रखने के लिए ठगों ने पंकज को कथित समझौता पत्र और रसीद भी भेजी। बाद में दस्तावेजों और पूरी प्रक्रिया पर संदेह होने के बाद उन्होंने बैंक और संबंधित साइबर सेल से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।
मामले में न्यायालय के आदेश के बाद करीब 2.10 लाख रुपये वापस मिलने की बात भी सामने आई है। शेष रकम और आरोपियों की पहचान को लेकर जांच की जा रही है।
डीसीपी साइबर शैव्या गोयल के मुताबिक तीनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और जांच की जा रही है। पुलिस बैंक खातों, यूपीआई लेनदेन, मोबाइल नंबर और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
साइबर पुलिस ने लोगों को इस तरह की ठगी से बचने के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है। व्हाट्सऐप पर किसी अनजान व्यक्ति की ओर से भेजे गए लिंक पर क्लिक करने या संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने से बचना चाहिए। ऑनलाइन टास्क, निवेश या कमाई के नाम पर पहले रुपये जमा कराने की मांग की जाए तो विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
किसी नामी कंपनी की फ्रेंचाइजी लेने से पहले कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत संपर्क माध्यमों से पूरी जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है। बैंक खाते की जानकारी, यूपीआई पिन, ओटीपी, कार्ड डिटेल और पासवर्ड किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना चाहिए।


