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New Delhi: 24 वर्षीय युवक की अनडिसेंडेड टेस्टीस की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न

New Delhi: 24 वर्षीय युवक की अनडिसेंडेड टेस्टीस की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न

नई दिल्ली, 7 नवम्बर : जन्मजात विकृति अनडिसेंडेड टेस्टीस से पीड़ित 24 वर्षीय युवक की जटिल सर्जरी सर गंगाराम अस्पताल में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यह सर्जरी 18 माह की उम्र से पहले होनी चाहिए थी, लेकिन विलंब के कारण समस्या गंभीर रूप ले चुकी थी।

विशाल जर्म सेल ट्यूमर निकाला गया
डॉ. (प्रो.) आशीष डे के नेतृत्व में की गई इस सर्जरी में डॉ. (प्रो.) तरुण मित्तल, डॉ. अनमोल आहूजा, डॉ. श्रेष्टा मंग्लिक, डॉ. अभिनीत और डॉ. आशिक शामिल थे। मरीज के दाहिने वृषण में अधूरी उतरी टेस्टिस के कारण पेट में 24x14x15 सेमी आकार का विशाल जर्म सेल ट्यूमर विकसित हो गया था। ट्यूमर पेट के बीच से एक ही टुकड़े में लैप्रोस्कोपिक तरीके से सुरक्षित निकाल लिया गया। सौभाग्य से ट्यूमर फेफड़ों और लिंफ नोड्स तक नहीं फैला था। मरीज अगले ही दिन स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो गया।

समय पर जांच और जागरूकता जरूरी
डॉ. डे ने बताया कि क्रिप्टॉर्किडिज्म यानी अधूरी उतरी वृषण की समस्या देखने में मामूली लग सकती है, लेकिन इससे टेस्टिकुलर कैंसर और बांझपन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हर नवजात और शिशु की जांच यह सुनिश्चित करने के लिए की जानी चाहिए कि उसके दोनों वृषण सही जगह पर हैं। समय पर सर्जरी से गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है। यह स्थिति समय पर जन्मे प्रत्येक 30 में से 1 और समय पूर्व जन्मे प्रत्येक 3 में से 1 बच्चे में पाई जाती है।

सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा कि समाज में जागरूकता फैलाकर न केवल कैंसर बल्कि बांझपन जैसी समस्याओं से भी बचाव किया जा सकता है।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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