Food Safety: ग्रेटर नोएडा में मसाला फैक्ट्री पर छापा, 3759 किलो सामग्री सीज, मालिक पर FIR
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में नवरात्रों के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावट के संदेह में मसाला फैक्ट्री पर छापेमारी की। जिलाधिकारी मेधा रूपम के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने इटहेरा स्थित धर्मेश इंडस्ट्रीज मसाला फैक्ट्री में जांच अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान मसालों और उनमें इस्तेमाल होने वाली विभिन्न सामग्रियों के 13 नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए। टीम ने करीब 3759 किलोग्राम सामग्री सीज की है। मामले में फैक्ट्री मालिक के खिलाफ बिसरख थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसके साथ ही फैक्ट्री का लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई भी की जा रही है।
सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय सर्वेश मिश्रा ने बताया कि जांच के दौरान फैक्ट्री में बड़ी मात्रा में मसाले और उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री मिली। इनमें 125 किलोग्राम मिर्च के बीज, 1050 किलोग्राम हल्दी पाउडर, 315 किलोग्राम धनिया पाउडर, 525 किलोग्राम मिर्च पाउडर, 360 किलोग्राम धनिया के टुकड़े और 140 किलोग्राम साबुत हल्दी शामिल हैं। इसके अलावा 600 किलोग्राम धनिया की डंडी की भूसी, 180 किलोग्राम अन्य डंडी और मिर्च के बीज, 100 किलोग्राम सोयाबीन की बड़ी, 300 किलोग्राम साबुत मिर्च, 2 किलोग्राम पीला रंग, 2 किलोग्राम लाल रंग और 60 किलोग्राम सरसों का तेल भी मिला।
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने फैक्ट्री में इस्तेमाल हो रही सामग्री की जांच करते हुए कुल 13 नमूने एकत्र किए। इनमें पीले और लाल रंग के साथ भूसी जैसी सामग्री के नमूने भी शामिल हैं। इन नमूनों को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है, ताकि उनकी गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप होने का पता लगाया जा सके। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने कार्रवाई के दौरान करीब 3759 किलोग्राम सामग्री सीज की। फैक्ट्री मालिक के खिलाफ बिसरख थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसके साथ ही फैक्ट्री का लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। छापेमारी की कार्रवाई में ओपी सिंह, विशाल कुमार गुप्ता, विजय बहादुर पटेल, रविंद्र नाथ वर्मा, मुकेश कुमार और रितु सक्सैना शामिल रहे।
सहायक आयुक्त सर्वेश मिश्रा ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग आगे भी इस तरह के जांच अभियान चलाता रहेगा। त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों में मिलावट की आशंका को देखते हुए विभाग की टीमें खाद्य निर्माण और बिक्री से जुड़े प्रतिष्ठानों की जांच करेंगी। इसका उद्देश्य लोगों तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री पहुंचाना तथा खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना है।


