Civil Defence Enrollment: विधायक डॉ. अनिल गोयल की पहल रंग लाई, दिल्ली सरकार ने सिविल डिफेंस वालंटियर्स के नए एनरोलमेंट के लिए शुरू किया आमंत्रण
रिपोर्ट: रवि डालमिया
नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के डीडीसी चेयरमैन एवं विधायक डॉ. अनिल गोयल द्वारा दिल्ली विधानसभा में सिविल डिफेंस वालंटियर्स के नए एनरोलमेंट का मुद्दा उठाए जाने के बाद दिल्ली सरकार ने इस दिशा में कदम आगे बढ़ाया है। सरकार की ओर से राजधानी में सिविल डिफेंस वालंटियर्स के नए एनरोलमेंट के लिए आमंत्रण शुरू किए गए हैं। इससे पूर्वी दिल्ली सहित दिल्ली के विभिन्न इलाकों में सिविल डिफेंस व्यवस्था को मजबूत करने और आपदा या आपात स्थिति में प्रशासन को अतिरिक्त सहयोग उपलब्ध कराने की उम्मीद है।
विधानसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए डॉ. अनिल गोयल ने सिविल डिफेंस वालंटियर्स की भूमिका की सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि ये वालंटियर्स केवल प्रशासनिक कार्यों में सहयोग नहीं करते, बल्कि आम जनता तक सरकार की योजनाओं, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों की जानकारी पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसी आपदा या आपात स्थिति के दौरान प्रशिक्षित वालंटियर्स प्रशासन और आम लोगों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम कर सकते हैं।
डॉ. गोयल ने विधानसभा में कहा था कि सिविल डिफेंस वालंटियर्स प्रशासन के सहयोगी के तौर पर काम करते हैं और उनकी सेवाओं का उपयोग विभिन्न परिस्थितियों में किया जा सकता है। उनके मुताबिक, सरकार की योजनाओं और जनजागरूकता अभियानों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के साथ-साथ जरूरत के समय राहत एवं बचाव व्यवस्था में भी इनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने विशेष रूप से आपदा प्रबंधन और प्राथमिक सहायता के क्षेत्र में सिविल डिफेंस वालंटियर्स की उपयोगिता का उल्लेख किया था। भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने, प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने, भीड़ प्रबंधन करने और राहत-बचाव कार्यों में प्रशासन का सहयोग करने के लिए प्रशिक्षित वालंटियर्स उपयोगी साबित हो सकते हैं। इसके अलावा फर्स्ट एड प्रशिक्षण, पब्लिक अवेयरनेस अभियान और मॉक ड्रिल जैसी गतिविधियों में भी सिविल डिफेंस वालंटियर्स की भागीदारी रहती है।
डॉ. अनिल गोयल के अनुसार, पूर्वी दिल्ली में वर्तमान में करीब 550 सिविल डिफेंस वालंटियर्स हैं। उन्होंने विधानसभा में इस संख्या को मौजूदा जरूरतों के हिसाब से अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाकर कम से कम 1,000 के आसपास किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया था। उनका कहना था कि पूर्वी दिल्ली जैसे बड़े क्षेत्र में आपदा प्रबंधन और जनजागरूकता से जुड़े कार्यों के लिए अधिक संख्या में प्रशिक्षित वालंटियर्स की जरूरत है।
विधायक ने एनरोलमेंट प्रक्रिया को लेकर भी अपनी बात रखी थी। उनके अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में तीन महीने की अवधि में लगभग 124 नए सिविल डिफेंस वालंटियर्स को शामिल करने की प्रक्रिया होती है। उन्होंने सीमित संख्या में और छोटे अंतराल पर एनरोलमेंट करने के बजाय जरूरत के अनुसार पर्याप्त संख्या में वालंटियर्स को जोड़ने का सुझाव दिया था। साथ ही उन्होंने पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
डॉ. गोयल ने नए सिविल डिफेंस वालंटियर्स के लिए कम अवधि के बजाय कम से कम 11 महीने का कॉन्ट्रैक्ट दिए जाने का सुझाव भी विधानसभा में रखा था। उनका तर्क था कि लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट से वालंटियर्स को पर्याप्त समय तक सेवा करने का अवसर मिलेगा और प्रशासन को भी प्रशिक्षित एवं अनुभवी वालंटियर्स की सेवाएं लगातार मिल सकेंगी। इससे बार-बार नए लोगों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता भी कम हो सकती है।
अब दिल्ली सरकार की ओर से नए सिविल डिफेंस वालंटियर्स के एनरोलमेंट के लिए आमंत्रण शुरू किए जाने के बाद इस मांग को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है। नए वालंटियर्स के जुड़ने से आपदा प्रबंधन, प्राथमिक सहायता, जनजागरूकता, मॉक ड्रिल और प्रशासनिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध हो सकता है।
विधायक डॉ. अनिल गोयल की ओर से विधानसभा में उठाए गए मुद्दे के बाद सरकार की इस पहल को पूर्वी दिल्ली के साथ-साथ पूरी राजधानी में सिविल डिफेंस व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है। आने वाले समय में नए एनरोलमेंट के जरिए कितने वालंटियर्स जुड़ते हैं और उन्हें किस तरह की जिम्मेदारियां एवं प्रशिक्षण दिया जाता है, यह व्यवस्था की प्रभावशीलता के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।


