BSP Politics: मायावती ने फिर बदला फैसला, आकाश आनंद की बसपा में वापसी और राष्ट्रीय संयोजक पद पर नियुक्ति
बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी में वापस लेते हुए उन्हें राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी सौंप दी है। यह फैसला आकाश आनंद के पार्टी से निष्कासन के करीब 25 दिन बाद आया है। मायावती ने 5 अक्टूबर को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि काफी विचार-विमर्श के बाद पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित में आकाश आनंद को दोबारा काम करने का अवसर दिया गया है।
मायावती ने अपने बयान में कहा कि आकाश आनंद के व्यक्तित्व और कार्यशैली में पिछले कुछ समय में बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब आकाश पार्टी के प्रति अनुशासन, निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ काम करेंगे और संगठन में बार-बार बदलाव करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मायावती के मुताबिक, आकाश के पिता आनंद कुमार और छोटे भाई ईशान आनंद ने भी उनकी दोबारा पार्टी में वापसी पर सहमति जताई है।
आकाश आनंद की यह वापसी उनके और मायावती के बीच पिछले करीब ढाई साल से चल रहे उतार-चढ़ाव वाले राजनीतिक घटनाक्रम का नया अध्याय है। इससे पहले मई 2024 में मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाकर राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर की गई घोषणा भी वापस ले ली थी। हालांकि जून 2024 में उन्हें फिर से राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया और राजनीतिक उत्तराधिकारी की भूमिका भी बहाल की गई।
इसके बाद मार्च 2025 में आकाश आनंद को फिर बसपा से निष्कासित किया गया था, लेकिन करीब एक महीने बाद उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल कर लिया गया। बाद में उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं और वह चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर तथा फिर नेशनल कन्वेनर जैसे पदों पर भी रहे। सितंबर 2026 में एक बार फिर मायावती ने उन्हें पार्टी की बड़ी जिम्मेदारियों से हटा दिया था।
इस बार विवाद की पृष्ठभूमि में आकाश आनंद के ससुर और बसपा के वरिष्ठ नेता अशोक सिद्धार्थ का पार्टी से अलग होना भी रहा। मायावती ने 3 सितंबर को आकाश को बड़ी जिम्मेदारी से हटाते हुए कहा था कि उन्हें अभी राजनीतिक परिपक्वता की जरूरत है। इसके बाद 10 सितंबर को आकाश को पार्टी से भी बाहर कर दिया गया था। 23 सितंबर को मायावती ने उनके छोटे भाई ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दी थी।
आकाश आनंद ने 2 अक्टूबर को सोशल मीडिया के जरिए मायावती से माफी मांगी थी। उन्होंने उन्हें अपना राजनीतिक गुरु बताते हुए कहा था कि बसपा उनके लिए सिर्फ एक राजनीतिक पार्टी नहीं बल्कि परिवार की तरह है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि वह किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में जाने की तैयारी नहीं कर रहे हैं और मायावती के नेतृत्व में दोबारा बसपा के लिए काम करना चाहते हैं।
आकाश ने अपने पिछले रुख को स्पष्ट करते हुए कहा था कि अशोक सिद्धार्थ से जुड़े मामले में उनकी चुप्पी को गलत समझा गया। उनके मुताबिक, उस समय उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाई हुई थी, इसलिए वह मायावती की पोस्ट को दोबारा साझा नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि अगर उनकी इस चुप्पी से मायावती को ठेस पहुंची हो तो वह इसके लिए माफी मांगते हैं।
मायावती के ताजा फैसले से ईशान आनंद की हालिया नियुक्ति भी बदल गई है। सितंबर में आकाश को हटाए जाने के बाद ईशान को राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया था, लेकिन अब आकाश की वापसी के साथ संगठन में जिम्मेदारी का समीकरण फिर बदल गया है। मायावती ने कहा है कि ईशान ने बिना किसी पद के भी पार्टी के लिए काम करते रहने की इच्छा जताई है।
आकाश आनंद की वापसी ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण चरण में पहुंच रही हैं। बसपा के संगठन में आकाश को फिर से अहम जिम्मेदारी मिलने के बाद पार्टी की आगे की रणनीति और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी भूमिका पर नजर रहेगी। फिलहाल मायावती ने उनके पुनर्नियुक्ति के साथ यह स्पष्ट किया है कि पार्टी में अनुशासन और नेतृत्व के प्रति निष्ठा को महत्वपूर्ण माना जाएगा।


