YEIDA Board Meeting: 93वीं बोर्ड बैठक में कॉर्पस फंड और मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक पार्क को मंजूरी
नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी यीडा की 93वीं बोर्ड बैठक सोमवार को आयोजित हुई। बैठक में प्राधिकरण क्षेत्र में विकसित हो रही नागरिक सुविधाओं के दीर्घकालिक रखरखाव, वित्तीय स्थायित्व, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा निवेश के नए अवसर विकसित करने से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में प्राधिकरण की वित्तीय स्थिति की भी विस्तार से समीक्षा की गई।
बोर्ड के सामने रखे गए आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में 14 सितंबर 2026 तक यीडा की कुल प्राप्तियां 1,495.43 करोड़ रुपये थीं। वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 में 14 सितंबर 2026 तक यह राशि बढ़कर 4,222.37 करोड़ रुपये हो गई। इस तरह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में प्राधिकरण की प्राप्तियों में 182.35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
औद्योगिक और मिक्स्ड लैंड योजना के तहत भी बड़ी राजस्व प्राप्ति हुई है। इस मद से 2,420.70 करोड़ रुपये की आय दर्ज की गई, जो पूरे वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित बजट प्रावधान का 174.47 प्रतिशत बताई गई है। बोर्ड ने राजस्व में हुई इस वृद्धि के साथ प्राधिकरण के व्यय की भी समीक्षा की।
बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में संबंधित अवधि तक यीडा का कुल व्यय 2,333.72 करोड़ रुपये रहा था, जबकि वित्तीय वर्ष 2026-27 में 14 सितंबर तक कुल व्यय 5,501.71 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इसमें भूमि अधिग्रहण और विभिन्न बैंकों से लिए गए ऋण की अदायगी से जुड़े खर्च भी शामिल हैं।
प्राधिकरण के अनुसार, पिछले वर्ष की समान अवधि में भूमि अधिग्रहण और विभिन्न बैंकों से लिए गए ऋण के सापेक्ष 1,735.79 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। वहीं चालू वित्तीय वर्ष की समान अवधि में भूमि अधिग्रहण तथा विभिन्न बैंकों से लिए गए ऋण की अदायगी पर 4,344.34 करोड़ रुपये का व्यय किया गया।
बोर्ड बैठक का एक प्रमुख फैसला यीडा कॉर्पस फंड को लेकर रहा। प्राधिकरण क्षेत्र में विकसित हो रही नागरिक अवस्थापना के दीर्घकालिक रखरखाव और वित्तीय स्थायित्व को सुनिश्चित करने के लिए ‘यीडा कॉर्पस फंड इन्वेस्टमेंट रेगुलेशन 2026-27’ तैयार करने का निर्णय लिया गया।
इस व्यवस्था के तहत वन टाइम लीज रेंट और अन्य पात्र गैर-आवर्ती प्राप्तियों को अलग कॉर्पस फंड में रखा जाएगा। प्राधिकरण के अनुसार इस राशि का निर्धारित नियमों के तहत सुरक्षित तरीके से निवेश किया जाएगा। इससे मिलने वाले ब्याज और अनुमन्य राशि का इस्तेमाल भविष्य में नागरिक सुविधाओं के रखरखाव और मरम्मत के लिए किया जाएगा।
कॉर्पस फंड से होने वाली आय का उपयोग प्राधिकरण क्षेत्र की सड़कों, जलापूर्ति, सीवरेज एवं ड्रेनेज व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, पार्क, ग्रीन बेल्ट और अन्य नागरिक सुविधाओं के रखरखाव पर किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास के बाद तैयार हुई सुविधाओं के रखरखाव के लिए स्थायी वित्तीय संसाधन उपलब्ध रहें।
प्राधिकरण का कहना है कि अलग कॉर्पस फंड की व्यवस्था से सामान्य वित्तीय संसाधनों के इस्तेमाल में वित्तीय अनुशासन बढ़ाने के साथ निगरानी और पारदर्शिता भी मजबूत हो सकती है। नागरिक सुविधाओं के रखरखाव के लिए एक निर्धारित वित्तीय स्रोत होने से भविष्य की योजनाओं पर वित्तीय दबाव कम करने की दिशा में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
बोर्ड बैठक में महायोजना-2041 के तहत लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग गतिविधियों को बढ़ावा देने को लेकर भी अहम फैसला लिया गया। उत्तर प्रदेश मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क पॉलिसी-2024 के अनुरूप यीडा क्षेत्र में मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित करने की प्रक्रिया को मंजूरी दी गई है।
इसके तहत पात्र निवेशकों को ई-नीलामी के माध्यम से भूखंड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। प्राधिकरण का मानना है कि इससे क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग से जुड़ी गतिविधियों को संगठित रूप मिलेगा और आधुनिक सप्लाई चेन इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में मदद मिलेगी।
मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित होने से औद्योगिक इकाइयों को माल के भंडारण, परिवहन और वितरण से जुड़ी बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। इससे निवेश बढ़ने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना भी जताई गई है। यीडा क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रही औद्योगिक गतिविधियों के बीच लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना भविष्य की आर्थिक जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्राधिकरण क्षेत्र में औद्योगिक और शहरी गतिविधियों के विस्तार को देखते हुए बोर्ड बैठक में लिए गए फैसलों को दीर्घकालिक विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। एक तरफ नागरिक सुविधाओं के रखरखाव के लिए कॉर्पस फंड की व्यवस्था की जा रही है, वहीं दूसरी ओर लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग जैसे क्षेत्रों में नए निवेश के अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
यीडा के अनुसार इन योजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र में विकास की गति बनाए रखने के साथ भविष्य की आर्थिक और नागरिक जरूरतों के अनुरूप बुनियादी ढांचा तैयार करना है। औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने के साथ सड़कों, जलापूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज और अन्य नागरिक सुविधाओं का सतत रखरखाव भी जरूरी होगा। कॉर्पस फंड इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है।
93वीं बोर्ड बैठक में लिए गए फैसलों से यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स गतिविधियों और नागरिक बुनियादी ढांचे को एक साथ आगे बढ़ाने की रणनीति सामने आई है। आने वाले समय में कॉर्पस फंड के नियमों और मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क के लिए ई-नीलामी की प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ इन फैसलों का क्रियान्वयन चरण शुरू होगा।


