CJP Protest Case: अक्षत त्रिपाठी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, 5 लाख के बॉन्ड वाला नोटिस निरस्त

CJP Protest Case: अक्षत त्रिपाठी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, 5 लाख के बॉन्ड वाला नोटिस निरस्त

नोएडा। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के प्रदर्शन से जुड़े मामले में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बताया गया कि 4 सितंबर को अक्षत त्रिपाठी को जारी किया गया पांच लाख रुपये के निजी मुचलके वाला नोटिस पहले ही वापस लिया जा चुका है। इसके बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि इस नोटिस के आधार पर पहले की गई कोई भी कार्रवाई निरस्त मानी जाएगी और उसके आधार पर आगे किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

अक्षत त्रिपाठी को ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित CJP प्रदर्शन के सिलसिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS के तहत नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में उनसे छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए पांच लाख रुपये का निजी बॉन्ड भरने और समान राशि के दो जमानती पेश करने को कहा गया था।

मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने पहुंचने के बाद अदालत ने नोटिस जारी किए जाने के तरीके और समय को लेकर सवाल उठाए थे। अक्षत की ओर से दाखिल याचिका में नोटिस तथा उसके आधार पर की गई कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया था कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के बावजूद उनके खिलाफ इस तरह की प्रक्रिया शुरू की गई।

सोमवार को सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 4 सितंबर को जारी विवादित नोटिस वापस लिया जा चुका है। सरकार की ओर से यह जानकारी मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब नोटिस वापस लिया जा चुका है तो उसके आधार पर की गई किसी भी कार्रवाई का प्रभाव नहीं रहना चाहिए।

अदालत ने स्पष्ट किया कि 4 सितंबर के नोटिस के आधार पर अतीत में यदि कोई कार्रवाई की गई है तो उसे भी निरस्त माना जाएगा। साथ ही अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ उस नोटिस के आधार पर भविष्य में किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इससे छात्र को मामले में तत्काल राहत मिल गई है।

अक्षत त्रिपाठी गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्हें CJP के प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप के संबंध में पुलिस रिपोर्ट के आधार पर नोटिस जारी किया गया था। पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों में यह भी कहा गया था कि उनकी गतिविधियों से अन्य छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होने की स्थिति बनी और विश्वविद्यालय परिसर में तनाव की आशंका पैदा हुई।

अक्षत ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि उन्होंने प्रदर्शन में शांतिपूर्ण तरीके से हिस्सा लिया था। उनका पक्ष था कि प्रदर्शन में शामिल होने के कारण उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई की गई, जिसे उन्होंने अनुचित बताया। मामले के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद इसी कार्रवाई की वैधता और अदालत के पूर्व निर्देशों के अनुपालन को लेकर सवाल उठे।

4 सितंबर को जारी नोटिस के तहत अक्षत से पांच लाख रुपये का निजी मुचलका और पांच-पांच लाख रुपये के दो जमानती मांगे गए थे। नोटिस में उन्हें यह बताने के लिए कहा गया था कि उन्हें भविष्य में शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने के निर्देश क्यों न दिए जाएं। मामले की अगली प्रक्रिया के लिए सुनवाई की तारीख भी निर्धारित की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई उस व्यापक प्रकरण के संदर्भ में हुई, जिसमें CJP से जुड़े छात्र प्रदर्शनों को लेकर पहले से कई याचिकाएं और आदेश सामने आ चुके हैं। शीर्ष अदालत ने प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई के संबंध में अपने निर्देश दिए थे। इसी पृष्ठभूमि में अक्षत को नया नोटिस दिए जाने पर अदालत के समक्ष मामला उठाया गया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात को महत्व दिया कि संबंधित नोटिस अब वापस लिया जा चुका है। इसके बाद अदालत ने केवल नोटिस वापस लिए जाने की जानकारी दर्ज करने के बजाय उसके आधार पर की गई संभावित पिछली कार्रवाई को भी समाप्त मानने और आगे दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का स्पष्ट निर्देश दिया।

इस आदेश के बाद अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ 4 सितंबर के नोटिस से जुड़ी प्रक्रिया का कोई प्रभाव नहीं रहेगा। हालांकि, प्रदर्शन से जुड़े व्यापक मामलों में अन्य कानूनी और न्यायिक प्रक्रियाएं अलग स्तर पर जारी रह सकती हैं।

मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से यह भी जानकारी पहले दी गई थी कि नोटिस जारी करने वाले अधिकारी के खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्रवाई की गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा निवारक प्रावधानों के इस्तेमाल और अदालत के निर्देशों के पालन को लेकर भी चर्चा पैदा की है।

अक्षत त्रिपाठी को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत के बाद अब 4 सितंबर के विवादित नोटिस के आधार पर उनके खिलाफ किसी दंडात्मक कार्रवाई का रास्ता बंद हो गया है। अदालत के निर्देश के अनुसार उस नोटिस के आधार पर की गई कार्रवाई भी समाप्त मानी जाएगी।

 

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