Bus Fire: चीख-पुकार के बीच यात्रियों ने खिड़की तोड़कर बचाई जान, धुएं से घुटा दम; नौ लोग बस में ही जिंदा जले
नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में लगी भीषण आग के दौरान यात्रियों में अफरातफरी मच गई। बस के भीतर तेजी से धुआं भरने के बाद लोगों को सांस लेने में परेशानी होने लगी और चीख-पुकार शुरू हो गई। अपनी जान बचाने के लिए कुछ यात्री आगे के दरवाजे से बाहर निकले, जबकि कई लोगों ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर बस से बाहर छलांग लगा दी। हादसे में नौ यात्री बस के अंदर फंसे रह गए और उनकी मौत हो गई।
हादसे से बचे यात्रियों के मुताबिक, आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने तक का पर्याप्त समय नहीं मिला। कुछ ही मिनटों में बस का बड़ा हिस्सा आग की लपटों और घने धुएं से भर गया। हालात इतने भयावह हो गए कि यात्रियों को यह समझना मुश्किल हो रहा था कि किस रास्ते से बाहर निकला जाए।
घटना के समय बस में सवार ज्यादातर यात्री सो रहे थे। चश्मदीद यात्रियों के अनुसार, आग बस के इंजन वाले हिस्से की तरफ से शुरू हुई। शुरुआत में कुछ यात्रियों को धुएं की वजह से परेशानी महसूस हुई। जैसे-जैसे धुआं बढ़ता गया, लोगों को आग लगने का पता चला और इसके बाद बस के अंदर चीख-पुकार मच गई।
यात्रियों के मुताबिक, आग की सूचना मिलने के बाद चालक ने बस को सड़क किनारे रोक दिया और नीचे उतर गया। इसके बाद परिचालक भी बस से बाहर निकल गया। कुछ यात्रियों ने सो रहे लोगों को जगाया और आग लगने की जानकारी दी। इसके बाद अपनी जान बचाने के लिए यात्री तेजी से बस के आगे वाले हिस्से की ओर जाने लगे।
लेकिन उस समय तक आग तेजी से फैल चुकी थी। बस में धुआं लगातार बढ़ रहा था और अंदर दिखाई देना भी मुश्किल हो गया था। कई यात्रियों को सांस लेने में परेशानी होने लगी। कुछ लोग किसी तरह आगे के दरवाजे तक पहुंचे और वहां से बाहर निकलने में कामयाब रहे।
जब मुख्य रास्ते से निकलना मुश्किल हुआ तो कई यात्रियों ने बस की खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए। चश्मदीदों के अनुसार, बस में मौजूद फायर सिलेंडर का इस्तेमाल खिड़कियों के शीशे तोड़ने के लिए भी किया गया। यात्रियों ने किसी तरह रास्ता बनाया और कई लोग खिड़की से बाहर कूदकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।
बस का आपातकालीन दरवाजा भी खोला गया था। हालांकि, यात्रियों के अनुसार, वहां से बाहर निकलना आसान नहीं था। लोगों को काफी नीचे झुककर संकरी जगह से बाहर निकलना पड़ा। अफरातफरी और धुएं के बीच करीब 25 यात्री किसी तरह बस से बाहर निकल आए।
बस से बाहर निकलने वाले यात्रियों ने बताया कि हालात इतने खराब थे कि कुछ लोग यह तक नहीं समझ पा रहे थे कि किस दिशा में जाना है। धुएं की वजह से सामने कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। लोगों के बीच धक्का-मुक्की हो रही थी और हर कोई पहले बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था।
एक महिला यात्री ने बताया कि हादसे के वक्त वह सो रही थीं। अचानक किसी ने दरवाजा खटखटाया। जागने के बाद उन्होंने देखा कि वहां पहले से काफी भीड़ जमा थी। महिला ने बताया कि उन्होंने अपना कोई सामान लेने की कोशिश नहीं की और यहां तक कि जूते भी नहीं पहने। वह सिर्फ अपना मोबाइल फोन लेकर बाहर निकल गईं।
महिला यात्री के अनुसार, बस के अंदर धुआं इतना ज्यादा था कि कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था। अंदर फंसे लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही थी और दम घुटने जैसी स्थिति बन गई थी। धक्का-मुक्की के बीच जो लोग रास्ता बनाकर बाहर निकल पाए, वही अपनी जान बचा सके।
हादसे में कई यात्रियों ने बेहद दर्दनाक दृश्य देखा। चश्मदीदों के मुताबिक, आग ने कुछ ही देर में पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। अंदर फंसे नौ यात्रियों को बाहर नहीं निकाला जा सका और उनकी मौत हो गई। मृतकों में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
राहत और बचाव दल को भी बस के अंदर तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। आग पर काबू पाने के बाद बस के अंदर पहुंचकर फंसे यात्रियों को निकालने की कार्रवाई की गई। बताया गया कि कुछ शव इतनी बुरी तरह जल चुके थे कि उनकी पहचान करना भी चुनौतीपूर्ण हो गया।
रेस्क्यू अभियान कई घंटे तक चला। बस की क्षतिग्रस्त बॉडी और अंदर मौजूद अवशेषों को हटाकर शवों को बाहर निकाला गया। हादसे के बाद पुलिस, दमकल और प्रशासन की टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य संभाला और घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
इस हादसे में बच निकले यात्रियों के बयान जांच के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। पुलिस आग लगने के कारणों के साथ-साथ यह भी पता कर रही है कि घटना के समय बस को किस तरह रोका गया, यात्रियों को बाहर निकालने की प्रक्रिया कैसे हुई और आपातकालीन निकास तथा अन्य सुरक्षा इंतजाम किस स्थिति में थे।
यात्रियों की आपबीती से साफ है कि आग के साथ फैले धुएं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया था। कई लोगों के लिए बस से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढना ही सबसे बड़ी चुनौती बन गया था। खिड़कियां तोड़कर और आपातकालीन रास्ते का इस्तेमाल करके बाहर निकलने वाले यात्रियों ने किसी तरह अपनी जान बचाई, जबकि नौ लोग अंदर ही फंस गए।
फिलहाल हादसे की जांच जारी है और आग लगने की वास्तविक वजह तथा दुर्घटना के दौरान सुरक्षा इंतजामों की स्थिति की पड़ताल की जा रही है। इस दर्दनाक घटना में जान गंवाने वाले यात्रियों के परिवारों के लिए यह हादसा गहरे सदमे का कारण बन गया है, जबकि बचे लोगों की आंखों में अब भी उस रात का भयावह मंजर ताजा है।


