Mission Sahyog: ग्रेटर नोएडा पुलिस ने 104 गुम मोबाइल किए बरामद, 21 लाख रुपये के फोन मालिकों को लौटाए

Mission Sahyog: ग्रेटर नोएडा पुलिस ने 104 गुम मोबाइल किए बरामद, 21 लाख रुपये के फोन मालिकों को लौटाए

नोएडा। ग्रेटर नोएडा पुलिस के ‘मिशन सहयोग’ अभियान के तहत सर्विलांस सेल ने गुम हुए 104 मोबाइल फोन बरामद कर उनके मालिकों को वापस सौंप दिए। अलग-अलग कंपनियों के इन स्मार्टफोन की कुल अनुमानित कीमत करीब 21 लाख रुपये बताई गई है। लंबे समय बाद अपने मोबाइल वापस मिलने पर लोगों ने पुलिस की इस पहल की सराहना की।

यह अभियान पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के दिशा-निर्देश पर चलाया गया। डीसीपी ग्रेटर नोएडा रवि शंकर निम के नेतृत्व में सर्विलांस सेल ने विभिन्न थाना क्षेत्रों में गुम हुए मोबाइल फोन की तलाश के लिए तकनीकी स्तर पर अभियान चलाया। पुलिस ने CEIR पोर्टल और अन्य तकनीकी माध्यमों की सहायता से मोबाइल फोन को ट्रेस करना शुरू किया।

पुलिस के मुताबिक बरामद किए गए ज्यादातर मोबाइल चोरी होने के बजाय अलग-अलग परिस्थितियों में गुम हुए थे। कई लोगों के फोन भीड़भाड़ वाले इलाकों और साप्ताहिक बाजारों में गिर गए थे। कुछ लोगों के मोबाइल दोपहिया वाहन चलाते समय या सुबह-शाम टहलने के दौरान गुम हुए थे।

इसके अलावा ऑटो, टैक्सी, बस, मेट्रो और ई-रिक्शा में सफर के दौरान मोबाइल फोन छूटने के भी कई मामले सामने आए थे। मोबाइल गुम होने के बाद संबंधित लोगों ने ग्रेटर नोएडा जोन के अलग-अलग थानों में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इन शिकायतों के आधार पर सर्विलांस सेल ने मोबाइल तलाशने की प्रक्रिया शुरू की।

सर्विलांस टीम ने CEIR पोर्टल की मदद से गुम मोबाइल फोन से संबंधित तकनीकी जानकारी जुटाई। तकनीकी विश्लेषण के आधार पर मोबाइल की लोकेशन और इस्तेमाल से संबंधित उपलब्ध जानकारियों की जांच की गई। इसके बाद अलग-अलग स्थानों से कुल 104 मोबाइल फोन बरामद करने में सफलता मिली।

शनिवार को पुलिस ने बरामद मोबाइल फोन के वास्तविक मालिकों की पहचान और आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें फोन वापस सौंप दिए। बरामद किए गए सभी मोबाइल फोन की कुल कीमत करीब 21 लाख रुपये आंकी गई है।

काफी समय पहले गुम हुए मोबाइल वापस मिलने पर उनके मालिकों ने गौतमबुद्ध नगर पुलिस का आभार जताया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक ‘मिशन सहयोग’ का उद्देश्य तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल कर लोगों के गुम मोबाइल फोन तलाशना और सत्यापन के बाद उन्हें सुरक्षित तरीके से उनके वास्तविक मालिकों तक पहुंचाना है।

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