Farmers Protest: नोएडा प्राधिकरण के बाहर किसानों का हल्लाबोल, बिजली काटने पर भड़के; 5% प्लॉट और मुआवजे की मांग पर अड़े
नोएडा। अपनी लंबित मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहा। संगठन के जिलाध्यक्ष अशोक भाटी के नेतृत्व में किसान सेक्टर-96 स्थित नोएडा प्राधिकरण के मुख्य प्रशासनिक भवन के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर डटे रहे। किसानों ने साफ कर दिया है कि इस बार केवल आश्वासन पर आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा और मांगों पर ठोस समाधान मिलने के बाद ही वे वापस लौटेंगे।
धरने के दौरान उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब धरनास्थल की बिजली आपूर्ति बंद हो गई। बिजली कटने से नाराज किसानों ने प्राधिकरण प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और इसमें किसी तरह की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी।
किसानों ने चेतावनी दी कि आंदोलन में व्यवधान डालने का प्रयास किया गया तो वे आगे की रणनीति के तहत बड़ा कदम उठा सकते हैं। किसानों के विरोध के बाद धरनास्थल की बिजली आपूर्ति दोबारा बहाल कर दी गई।
धरने के दौरान नोएडा क्षेत्र के 81 गांवों के प्रतिनिधियों ने बैठक में हिस्सा लिया। जिलाध्यक्ष अशोक भाटी ने कहा कि किसान और ग्रामीण अपनी मांगों का समाधान कराए बिना घर वापस नहीं जाएंगे। विभिन्न गांवों से पहुंचे प्रतिनिधियों ने अपनी स्थानीय समस्याएं भी रखीं और आगे के आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की।
संगठन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी सुभाष चौधरी ने कहा कि किसान पिछले पांच वर्षों से अपनी समस्याओं को लेकर लगातार ज्ञापन देने के साथ अधिकारियों से वार्ता कर रहे हैं। इसके बावजूद कई महत्वपूर्ण मांगें लंबित हैं। उन्होंने कहा कि अब किसानों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं का समाधान चाहिए।
किसान नेताओं का कहना है कि वर्ष 1976 में नोएडा की स्थापना के दौरान किसानों की जमीन बेहद कम दरों पर अधिग्रहित की गई थी। समय के साथ उन्हीं क्षेत्रों में जमीन की कीमत कई गुना बढ़ गई, लेकिन कई पात्र किसान अब भी विकसित भूखंड और अन्य लाभों के लिए प्राधिकरण के चक्कर लगा रहे हैं।
किसानों ने प्राधिकरण की निर्माण संबंधी कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। सुभाष चौधरी ने आरोप लगाया कि बिल्डरों के अवैध निर्माण के मामलों में जिस तरह की कार्रवाई होनी चाहिए, वह नहीं होती, जबकि किसानों की जमीन पर उनके परिवार द्वारा निर्माण किए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जाती है। किसानों ने निर्माण से जुड़े मामलों में समान नीति अपनाने की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में वर्ष 1976 से 1997 के बीच जमीन अधिग्रहण से प्रभावित पात्र किसानों को पांच प्रतिशत विकसित भूखंड का लाभ देना शामिल है। इसके अलावा अधिग्रहित जमीन का उचित और बढ़ा हुआ मुआवजा देने तथा पात्र किसानों के लंबे समय से लंबित विकसित भूखंडों का जल्द आवंटन करने की मांग की जा रही है।
किसानों ने आवासीय निर्माण के मामलों में समान नीति लागू करने की मांग भी उठाई है। इसके साथ बिजली की दरों में राहत और ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था बेहतर करने का मुद्दा भी आंदोलन में प्रमुखता से उठाया गया।
किसान नेताओं ने कहा कि जब तक प्राधिकरण उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। धरने में एकलव्य सिंह सहारा, श्रीपाल कसाना, विपिन प्रधान, रविंद्र भगत, सिंह राज गुर्जर, योगेश भाटी, सोमेश भारद्वाज, धर्मेंद्र चपराना, मदन भाटी, सचिन अवाना और प्रमोद टाइगर समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।


