Dual Organ Transplant: पत्नी ने लिवर और बेटी ने किडनी देकर बचाई मरीज की जान, ग्रेनो वेस्ट में 16 घंटे चली जटिल सर्जरी
नोएडा। किडनी और लिवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक मरीज के लिए उसकी पत्नी और बेटी जीवनदाता बनीं। पत्नी ने अपने लिवर का हिस्सा और बेटी ने किडनी दान करने का फैसला लिया, जिसके बाद ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित यथार्थ अस्पताल में मरीज का दोहरा अंग प्रत्यारोपण किया गया। करीब 15 से 16 घंटे तक चली जटिल सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में सुधार बताया गया है। अस्पताल के मुताबिक प्रत्यारोपित लिवर और किडनी दोनों ठीक तरह से काम कर रहे हैं।
यथार्थ अस्पताल के लिवर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. विशाल कुमार चोरसिया ने बताया कि मरीज लंबे समय से किडनी से संबंधित गंभीर बीमारी से पीड़ित था। बीमारी की स्थिति को देखते हुए किडनी ट्रांसप्लांट ही उपचार का विकल्प बचा था। इसी बीच चिकित्सकीय जांच में मरीज के लिवर की गंभीर समस्या भी सामने आई।
डॉक्टरों के अनुसार मरीज हेपेटाइटिस-बी संक्रमण के कारण क्रॉनिक लिवर डिजीज से भी जूझ रहा था। ऐसे में केवल किडनी का प्रत्यारोपण पर्याप्त नहीं माना गया। मरीज की पूरी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने के बाद चिकित्सकों ने लिवर और किडनी दोनों का प्रत्यारोपण करने का निर्णय लिया।
मरीज का चिकित्सा इतिहास भी सर्जरी को चुनौतीपूर्ण बना रहा था। डॉक्टरों के मुताबिक उसके दाहिने गुर्दे में पहले ट्यूमर पाया गया था। इसके कारण करीब एक वर्ष पहले उसकी राइट रेडिकल नेफ्रेक्टॉमी की गई थी, जिसमें दाहिना गुर्दा निकालना पड़ा था।
इसके अलावा मरीज में पहले से कोरोनरी आर्टरी डिजीज की समस्या भी मौजूद थी। वहीं लिवर डोनर में फैटी लिवर की स्थिति होने के कारण प्रत्यारोपण की योजना तैयार करते समय डॉक्टरों को कई चिकित्सकीय पहलुओं का विशेष ध्यान रखना पड़ा।
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए परिवार ने अंगदान का फैसला लिया। उसकी पत्नी ने लिवर दान करने की सहमति दी, जबकि बेटी किडनी डोनर बनी। आवश्यक चिकित्सकीय जांच और प्रत्यारोपण से संबंधित प्रक्रिया पूरी करने के बाद सर्जरी की तैयारी की गई।
दो अंगों के प्रत्यारोपण के कारण पूरी सर्जरी करीब 15 से 16 घंटे तक चली। इस दौरान अलग-अलग विशेषज्ञ टीमों ने आपसी समन्वय के साथ काम किया। लिवर ट्रांसप्लांट और किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञों के अलावा एनेस्थीसिया, ब्लड बैंक और क्रिटिकल केयर टीम भी पूरी प्रक्रिया में शामिल रही।
डॉक्टरों के मुताबिक पहले से मौजूद बीमारियों और दोहरे प्रत्यारोपण के कारण ऑपरेशन काफी जटिल था। सर्जरी के दौरान मरीज की स्थिति की लगातार निगरानी की गई और दोनों अंगों के प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया गया।
अस्पताल के अनुसार प्रत्यारोपण के बाद मरीज में रिकवरी के अच्छे संकेत दिखाई दिए हैं। चिकित्सकीय जांच में प्रत्यारोपित लिवर और किडनी दोनों के ठीक तरह से काम करने की बात सामने आई है। मरीज को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया और उसकी रिकवरी पर लगातार नजर रखी गई।
अस्पताल की टीम का कहना है कि मरीज की पत्नी और बेटी द्वारा अंगदान का निर्णय इस जटिल प्रत्यारोपण में बेहद महत्वपूर्ण रहा। परिवार के सहयोग और विभिन्न चिकित्सा विभागों के समन्वय से दोहरे अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी की जा सकी।


