Vehicle Theft Gang: मैकेनिक और कबाड़ी मिलकर चुराते थे दोपहिया वाहन, बादलपुर पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा; 14 गाड़ियां बरामद
नोएडा। बादलपुर थाना पुलिस ने दोपहिया वाहन चोरी करने वाले एक कथित अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि दोनों मिलकर नोएडा और आसपास के क्षेत्रों से मोटरसाइकिल और स्कूटी चोरी करते थे। आरोपियों की निशानदेही पर 13 मोटरसाइकिल और एक स्कूटी समेत कुल 14 दोपहिया वाहन बरामद किए गए हैं। उनके कब्जे से दो अवैध चाकू भी मिलने की बात कही गई है।
डीसीपी सेंट्रल नोएडा शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि बादलपुर थाना पुलिस को वाहन चोरी करने वाले आरोपियों के संबंध में गोपनीय सूचना मिली थी। इसके साथ ही पुलिस मैनुअल इंटेलिजेंस के जरिए भी संदिग्धों के बारे में जानकारी जुटा रही थी। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने आरोपियों को पकड़ने के लिए कार्रवाई की।
पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपियों को छह प्रतिशत आबादी के पास से गिरफ्तार किया गया। उनकी पहचान सैफ अली पुत्र जाहिद अली और शादाब पुत्र आशिक अली के रूप में हुई है। गिरफ्तारी के बाद दोनों से वाहन चोरी की घटनाओं के संबंध में पूछताछ की गई।
पुलिस का दावा है कि आरोपियों से मिली जानकारी और उनकी निशानदेही के आधार पर अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई की गई। इस दौरान चोरी की बताई जा रही 13 मोटरसाइकिल और एक स्कूटी बरामद की गई। अब पुलिस इन सभी वाहनों के रिकॉर्ड की जांच कर उनके वास्तविक मालिकों और चोरी के मुकदमों की जानकारी जुटा रही है।
पूछताछ में दोनों आरोपियों के काम करने के तरीके के बारे में भी जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार सैफ अली पेशे से मैकेनिक है, जबकि शादाब कबाड़ खरीदने का काम करता है। दोनों अपने काम से जुड़ी जानकारी और अनुभव का इस्तेमाल कर कथित रूप से वाहन चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे।
पुलिस का कहना है कि आरोपी पहले उन स्थानों की रेकी करते थे, जहां बड़ी संख्या में दोपहिया वाहन खड़े रहते थे। इसके बाद मौका देखकर ऐसी मोटरसाइकिल या स्कूटी को निशाना बनाया जाता था, जिसे आसानी से चोरी किया जा सके। वाहन हाथ लगने के बाद आरोपी तुरंत मौके से फरार हो जाते थे।
चोरी के वाहनों को तुरंत बेचने के बजाय आरोपी उन्हें कुछ समय के लिए छिपाकर रखते थे। पुलिस के मुताबिक इसके लिए सुनसान स्थान पर मौजूद एक खाली प्लॉट का इस्तेमाल किया जाता था। चोरी की बाइक और स्कूटी को वहां खड़ा करने के बाद आरोपी उन्हें बेचने के लिए ग्राहक तलाशते थे।
पुलिस का दावा है कि आरोपी चोरी के वाहनों को बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर बेचते थे। राहगीरों और अन्य संभावित खरीदारों को सस्ते दाम का लालच देकर वाहन बेचने का प्रयास किया जाता था। वाहन बेचने से मिलने वाली रकम को दोनों आरोपी कथित तौर पर बराबर बांट लेते थे।
पूछताछ के आधार पर पुलिस ने बताया कि चोरी के वाहनों को बेचकर मिलने वाली रकम का इस्तेमाल आरोपी अपनी निजी जरूरतों और मौज-मस्ती के लिए करते थे। पुलिस अब यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अब तक दोनों ने कितने चोरी के वाहन बेचे हैं और उन वाहनों को किन लोगों ने खरीदा।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दोनों आरोपियों के खिलाफ नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली के अलग-अलग थानों में पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं। दोनों से संबंधित कुल पांच मुकदमे पहले से दर्ज होने की जानकारी दी गई है। पुलिस इन मामलों का विवरण भी मौजूदा जांच से जोड़कर देख रही है।
बरामद किए गए सभी 14 दोपहिया वाहनों के इंजन नंबर, चेसिस नंबर और अन्य पहचान संबंधी विवरण की जांच की जा रही है। इसके जरिए पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संबंधित वाहन कहां से और कब चोरी हुए थे तथा उनके संबंध में किन थानों में मुकदमे दर्ज हैं।
इसके साथ ही पुलिस गिरोह के संभावित नेटवर्क की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि सैफ अली और शादाब के अलावा वाहन चोरी, उन्हें छिपाने या बेचने में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं। पूछताछ और बरामद वाहनों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।


