AI in Homeopathy: होम्योपैथी में AI की दस्तक, व्यक्तिगत इलाज और शोध में उपयोग पर मंथन; जिम्मेदार इस्तेमाल पर विशेषज्ञों का जोर
नई दिल्ली, 31 अगस्त। चिकित्सा और स्वास्थ्य अनुसंधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती भूमिका के बीच अब होम्योपैथी के क्षेत्र में भी इसके इस्तेमाल की संभावनाओं पर मंथन तेज हो गया है। केरल के कोट्टायम में सोमवार को आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विशेषज्ञों ने क्लीनिकल निर्णय सहायता, व्यक्तिगत उपचार और अनुसंधान में AI के संभावित उपयोग पर चर्चा की। इसके साथ ही मानवीय निगरानी, वैज्ञानिक सत्यापन, विश्वसनीय डेटा और नैतिक सुरक्षा उपायों को इसकी अनिवार्य शर्त बताया गया।
केंद्रीय आयुष मंत्रालय के तहत केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH) के राष्ट्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान मानसिक स्वास्थ्य, कोट्टायम में इस राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें चिकित्सा विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और होम्योपैथी से जुड़े संस्थानों के प्रतिनिधियों ने AI के इस्तेमाल से जुड़ी संभावनाओं और चुनौतियों पर विचार साझा किए।
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करने पर जोर दिया।
सेमिनार के दौरान इस बात पर चर्चा हुई कि AI का इस्तेमाल चिकित्सकों के क्लीनिकल निर्णय में सहायता के लिए किस तरह किया जा सकता है। बड़ी मात्रा में उपलब्ध स्वास्थ्य संबंधी डेटा का विश्लेषण करने की AI की क्षमता को चिकित्सा क्षेत्र में एक संभावित उपयोगी उपकरण के रूप में देखा जा रहा है।
इसके साथ ही व्यक्तिगत उपचार में AI की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। विशेषज्ञों ने मरीज से जुड़ी उपलब्ध जानकारी और चिकित्सा डेटा के विश्लेषण में तकनीक की भूमिका पर चर्चा की।
हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि AI को चिकित्सक के निर्णय का स्वतः विकल्प मानने के बजाय एक सहायक तकनीक के रूप में जिम्मेदारी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। चिकित्सा संबंधी अंतिम निर्णय में प्रशिक्षित स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानवीय निगरानी को आवश्यक बताया गया।
सेमिनार में वैज्ञानिक सत्यापन को भी प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया गया। विशेषज्ञों का कहना था कि स्वास्थ्य क्षेत्र में इस्तेमाल किए जाने वाले किसी भी AI सिस्टम की विश्वसनीयता के लिए उसके परिणामों और कार्यप्रणाली का वैज्ञानिक स्तर पर परीक्षण जरूरी है।
AI मॉडल जिस डेटा के आधार पर परिणाम देते हैं, उसकी गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि गलत, अधूरा या अविश्वसनीय डेटा स्वास्थ्य संबंधी निर्णयों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण डेटा का इस्तेमाल महत्वपूर्ण है।
इसके साथ ही मरीजों की जानकारी की सुरक्षा और तकनीक के नैतिक इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं पर भी जोर दिया गया। स्वास्थ्य क्षेत्र में AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और जवाबदेही जैसे विषयों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
होम्योपैथी अनुसंधान में भी AI के इस्तेमाल की संभावनाओं पर मंथन किया गया। बड़ी मात्रा में शोध डेटा के विश्लेषण, पैटर्न की पहचान और अध्ययन से जुड़े विभिन्न पहलुओं में तकनीक की संभावित भूमिका पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
राष्ट्रीय सेमिनार के दौरान संस्थागत सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के साथ कुल नौ समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
इन समझौतों का उद्देश्य शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देना है। विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग से शोध गतिविधियों और चिकित्सा से जुड़े अध्ययन को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
इसके अलावा सेवा भारती, एट्टुमानूर के साथ भी अनुसंधान सहयोग के लिए समझौता किया गया। इससे संस्थागत स्तर पर शोध और संबंधित गतिविधियों में सहयोग को बढ़ाने का रास्ता तैयार होगा।
कोट्टायम में आयोजित सेमिनार ने होम्योपैथी में AI के उपयोग की संभावनाओं के साथ इससे जुड़ी जिम्मेदारियों को भी चर्चा के केंद्र में रखा। विशेषज्ञों ने तकनीक को अपनाने के साथ वैज्ञानिक प्रमाण, गुणवत्तापूर्ण डेटा और नैतिक मानकों से समझौता नहीं करने पर जोर दिया।
स्वास्थ्य क्षेत्र में AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह चर्चा महत्वपूर्ण है कि तकनीक का उपयोग मरीजों और चिकित्सकों की सहायता के लिए किस प्रकार सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से किया जाए। सेमिनार में सामने आए विचारों के मुताबिक AI की क्षमता का लाभ उठाने के साथ मानवीय निगरानी और वैज्ञानिक सत्यापन को प्राथमिकता देना आवश्यक होगा।


